10/23/2018

how to get rid of gas immediately

how to get rid of gas immediately


तुरंत गैस से छुटकारा पाने के लिये ये उपाय करे


how-to-get-rid-of-gas-immediately, turant-gas-se-chhutakaara-paane-ke- liye-ye-upaay-kare

नमस्कार दोस्तों
  • भोजन से पहले 10 ग्राम अद्रक के बारीक़ टुकड़े पर नमक लगाकर खाना चाहिये। 
  • भोजन से पहले एक चम्मच तुलसी और नींबू का रस पिये। 
  • काला नमक, काली मिर्च, सेंधा नमकसोंठ समान मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर रखलो। ये मिश्रण 3 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ लेने पर गैस की तकलीफ में आराम मिलता है। 
  • जिन लोगो को गैस की हमेशा दिक्क़त रहती है। उन्हें भोजन के बाद सोंठ और हरड का चूर्ण 1-1 चम्मच लेने से काफी राहत मिलती है। 
how-to-get-rid-of-gas-immediately, turant-gas-se-chhutakaara-paane-ke-liye-ye-upaay-kare, अद्रक, नमक, तुलसी, नींबू-का-रस, काला-नमक, काली-मिर्च, सेंधा-नमक,सोंठ,शहद, गैस-की-तकलीफ, हरड-का-चूर्ण, लहसुन, पाचन, ह्रदय, उधर-की-वायु, पेट-के-कीड़े, शंख-भस्म, अग्निमांद्य,उदरशुल, मलावरोध, एरंडी-तेल, पिपरमिंट,how-to-get-rid-of-gas-home-remedy, how-to-get-rid-of-gas-pains, how-to-get-rid-of-trapped-gas, how-do-you-get-rid-of-a-gas-bubble-in-your-stomach, how-to-get-rid-of-gas-pain-in-chest, positions-to-relieve-gas, gas-pain-relief, how-to-relieve-gas-pain,
how to get rid of gas immediately

  • भोजन के बाद 200 ग्राम मठ्ठे में 2 ग्राम अजवाइन और आधा ग्राम नमक मिलाकर पिने से लाभ मिलता है। हफ्ते-दो हफ्ते तक यह प्रयोग दिन में एक बार करे। 
  • रोज सुबह लहसुन की दो कच्ची कलिया पानी या दूध के साथ सेवन करे। पेट में गैस नहीं रहती, पाचन क्रिया ठीक होती है, ह्रदय की बिमारी के ले बहुत फायदे मंद होता है। 
  • भुनी हींग एक भाग, वच दो भाग, कुठ तीन भाग, काला नमक चार भाग, बायबिडंग पाच भाग लेकर बारीक़ कपडा छन्नी चूर्ण बनाकर एक बर्तन में एक जीव मिलाकर रख लो। इसे आधे चम्मच की मात्रा पानी के साथ ले। उधर की वायु ठीक करता है और पेट के कीड़े है तो खत्म हो जाते है। 
  • छोटी हरड़ 5 तोला, सेंधा नमक, अजवाइन, चित्रक की छाल, अजमोद सभी 2-2 तोला और पीपल, समुद्र नमक, विडंनमक, काला नमक, काँच नमक, सज्जीक्षार, यवक्षार, सुहाने का फुला, हिंग का फुला, काला जीरा सभी 1-1 तोला। सभी औषधि को कपडा छन्नी चूर्ण बनाकर एक जीव मिला दो। आधा तोला शंख भस्म मिलाकर रख लो। यह चुर्ण आधा चम्मच मात्रा गरम पाणी में भोजन के बाद लेने से आध्मान में आराम मिल जाता है। यह योग अग्निमांद्य, उदरशुल, और मलावरोध जैसे रोगों में लाभदायक है।
  • हिंग्वष्टक चुर्ण 400 ग्राम, लवन भास्कर चुर्ण 400 ग्राम, बिज निकाले हुये मनुके 400 ग्राम, एरंडी तेल, नौसादर, सुहागे, का फुला प्रत्येक 25-25 ग्राम तथा पिपरमिंट 6 ग्राम लो। सबसे पहले मनुका अच्छी तरह पिसकर बल्क बना लो। अब पिपरमिंट व अन्य सभी पदार्था का कपडा छन्नी चुर्ण बना कर मनुका बल्क में मिलाकर छोटी-छोटी गोली बना लो। आवश्यकता नुसार 1 या 2 गोली दिन मे 3 बार पाणी के साथ सेवन करनी चाहियें। गैस सभी रोग इससे ठिक हो जाते है।
  • how-to-get-rid-of-gas-immediately, turant-gas-se-chhutakaara-paane-ke- liye-ye-upaay-kare
  • धन्यवाद दोस्तों 

10/14/2018

Acidic And Ulcers Diseases And Tips

अम्लपित्त व अल्सर (एसिडीटी) में पथ्य अपथ्य व नुस्खे

Acidic-And-Ulcers-Diseases-Prescriptions-and-Tips-Esidik-Rog-nuskhe-aur-Tips
नमस्कार दोस्तों
  • अम्लपित्त में पथ्य-अपथ्य अम्लपित्त के रोगी को तले-भुने, खट्टे, तैलीय पदार्थ, वनस्पति घी, से बने पदार्थ नहीं खाने चाहिये। उपवास हानिकारक होता है। खट्टे में (आँवला चलता है) पत्ता गोभी का रस अम्लपित्त में बेहद फायदेमंद होता है। काकड़ी, गाजर, खीरा, इत्यादि का पथ्य है। दालों में मुंग, अरहर की दाल खाई जा सकती है। ठंडा दूध और पके केले खाना लाभदायक  होता है। 
                                                                           
Acidic-And-Ulcers-Diseases-Prescriptions-and-Tips,Esidik-Rog-nuskhe-aur-Tips,peptic-ulcer-diet, peptic-ulcer-treatment, stomach-ulcer-diet-menu, stomach-ulcer-treatment-at-home, stomach-ulcer-stress, duodenal-ulcer, how-to-cure-stomach-ulcer-permanently, how-to-test-for-stomach-ulcers-at-home, types-of-ulcer, peptic-ulcer-symptoms, peptic-ulcer-pathophysiology,deei-health-tips,अम्लपित्त-में-पथ्य-अपथ्य,अल्सर-या-पेट-के-रोग,अम्लता-अल्सर-में-लाभप्रद,अल्सर-में-पथ्य-अपथ्य,पित्तदोष,अम्लता,अल्सर, क्षयरोग,मीठे-फलो-का-रस,ठंडा-दूध,आइसक्रीम,पतली-खिचड़ी,मुंग,बलवर्धक,पाचनशक्ति,पीलिया,सिरदर्द,पत्तागोभी-का-रस,
Acidic And Ulcers Diseases And Tips
      
  • अल्सर या पेट के रोग शतावरी चूर्ण 10-15 ग्राम दूध या पानी 200 ग्राम साथ ले आवश्यकतानुसार शक़्कर इलाइची के दाने लेकर सबको मिलाकर धीमी आँच पर पकाये। दूध गाढ़ा हो जाये तो उतारकर ठंडा होने के बाद इसे धीरे-धीरे खालो। इसका उपयोग दिन में दो-तीन बार किया जा सकता है। अल्सर रोगी को निश्चित ही आराम गिरेगा।
  1. आमाशय में अल्सर होने पर मेथी के दाने को नित्य स्वरूप 2 बार ले दोपहर के भोजन से आधा घंटे पहले व रात को सोने से पहले लाभ होने तक लेते रहना चाहिये।  
  2. कामदुधा रस, सूतशेखर रस, शंखभस्म, प्रवाल-पंचामृत, और वराटिका-भस्म 2-2 ग्राम दूध या पानी के साथ ले। इन सबको मिलाकर या अलग-अलग भी लिया जा सकता है। 
  3. दालचीनी 2 ग्राम, अनारदाना 3 ग्राम, सूखा पुदीना 3 ग्राम, आँवला 3 ग्राम, इलाइची 5 ग्राम, मनुक्का 15 ग्राम व काला जीरा 1 ग्राम लेकर इन सबको 90 पानी के एक साथ पीसे। अब इसमें 20 ग्राम गुलकंद मिलाये व छानकर रोगी को पिलाये।
  4. अम्लपित्त, पाचन क्रिया की गड़बड़ी से होनेवाले वायु, पेट का भारीपन,पेटदर्द, पीलिया, सिरदर्द व बायोकैमी की दवा 'नेट्रम फास-3x', 'नेट्रम सल्फ-3x' व 'साइलीशिया-12x' की एक-एक गोली मिलाकर तीन-तीन घंटे पर चुसनी चाहिये। 
  • अम्लता अल्सर में लाभप्रद पिसी हुई या कद्दूकस की हुई नारियल की गिरी 32 ग्राम, घी 8 ग्राम, नारियल का पानी या गाय का दूध 128 ग्राम, व चीनी 32 ग्राम ले। सबसे पहले नारियल के बुरादे को घी में धीमी आँच पर हल्का सा भुने। अब इसमें नारियल के पानी या दूध व चीनी मिलाकर धीमी आँच पर पकाये। चाचणी गाढ़ी हो जाये तो आग से उतारकर किसी बर्तन में जमा करले। ठंडा होने पर इसे छोटे-छोटे टुकड़े काट लो। इसे सुबह-शाम 2-4 ग्राम की मात्रा में लेकर दूध या पानी के साथ सेवन करना चाहिये। यह शारीरिक रूप से कमजोर लोगो के लिये बलवर्धक होता है और पित्तदोष, अम्लता, अल्सर, क्षयरोग में भी बहुत कारगर होता है। इसके अलावा पाचनशक्ति को भी प्रबल बनती है। 
  • अल्सर में पथ्य-अपथ्य  अल्सर के रोगी को सादा आहार और पतला आहार लेना चाहिये। महत्वपूर्ण आहार खट्टा न होलसुन, प्याज, मिर्च-मसाले, बैगन, टमाटर, सुरन, तैलीय पदार्थ इत्यादि पदार्थ बंद कर देनी चाहिये। अल्सर में मीठे फलो का रस, ठंडा दूध, आइसक्रीम, पतली खिचड़ी, मुंग, ये पदार्थ काफी लाभप्रद है। पत्तागोभी का रस काफी फायदेमंद होता है। मात्रा 1-1 कप पत्तागोभी का रस दिन में 5-6 बार लेने से अल्सर में काफी राहत मिलेगी। 
Acidic-And-Ulcers-Diseases-Prescriptions-and-Tips-Esidik-Rog-nuskhe-aur-Tips
  • धन्यवाद दोस्तों 

10/07/2018

Digestive system prescriptions and disease (part 2)

पाचन तंत्र के रोग व नुस्खें (भाग 2 )

Digestive-system-prescriptions-and-disease-(part-2 )-paachan-tantr-ke-rog-va-nuskhe
नमस्कार दोस्तों 


  • विविध रोगनाशक एक किलो अजवाइन को 1 लीटर गोमूत्र में डाल दो। और तीन दिन के बाद गोमूत्र को छानकर अलग कर दो। अब अजवाइन को 1 लीटर मठ्ठे में डाल दो। एक दिन बाद छानकर सूखा ले, फिर 250 ग्राम कच्ची हींग को घी में सेककर सुका ले। फिर 100 ग्राम काला नमक व 50 ग्राम हींग, इन चारों  पदार्थ को कुट पीस कर छानकर डिब्बी में भर ले। इसे सुबह-शाम एक-एक चम्मच भोजन के बाद सेवन करे। इससे एसिडीटी, कब्ज, पेट की जलन, मलावरोध, अजीर्ण, खट्टी डकारे, कृमिरोग, बदहजमी, इत्यादि रोग सभी प्रकार के उदर रोग ठीक होते है। नियमित चूर्ण खाने से पाचनशक्ति बढ़ती है। 
    Digestive-system-prescriptions-and-disease-(part-2 ),paachan-tantr-ke-rog-va-nuskhe-(bhag-2),desi-health-tips,ayurved,lifestyle,विविध-रोगनाशक,एसिडीटी,कब्ज,पेट-की-जलन,मलावरोध,अजीर्ण,खट्टी-डकारे,कृमिरोग,बदहजमी,पाचनशक्ति,अग्निमांध,अतिसार-या-पतले-दस्त,पेचिश-मे-पथ्य-अपथ्य,छाछ,दही,मुंग-की-दाल,अनार-का-रस,रोटी,पराठे,नमकीन,मिर्च-मसाले,अचार-चटनी,तली,भुनी,मरोड़फल्ली,पेट-में-शूल,हरड़,इसबगोल,बबूल-का-गोंद,बड़ी-हरड़,सौंफ,बड़ी-हरड़,का-छिलका,सोंठ-व-सौंफ,
    Digestive system prescriptions and disease (part 2)
  • अग्निमांध अदरक की एक गाठ 15-20 ग्राम की लेकर उसका छिलका उतार कर उसके छोटे-छोटे और पतले-पतले टुकड़े बना ले। अब इन पर साधारण या काला नमक छिड़ककर प्रतिदिन भोजन से लगभग 10 -15 मिनट पूर्व चबाकर खा ले। ये जठराग्नि को प्रदीप्त करने का यह जबरदस्त उपयोग है। जिन लोगो को अग्निमांध की ज्यादा शिकायत होती है। उन्हें भोजन पूर्व 10-20 ग्राम अदरक का रस पी लेना चाहिये। चाहें तो इससे थोड़ा शहद भी मिला सकते है।
  • अतिसार या पतले दस्त सोंठ का चूर्ण 3-5 ग्राम छाछ या पानी के साथ लेने से दस्त रोगी को दिन मै 2-3 बार सेवन करने से दस्त रुक जाते है। छोटे बच्चे को भी सोंठ घिसकर दिया जा सकता है। सोंठ को और गुणशाली बनाने के लिये, सूखे नारियल का एक अखंड गोला लीजिये। और उसमे एक छोटा सा छेद करके सोंठ का चूर्ण कसकर भर दीजिये। अब गोले का छेद उसी टुकड़े से बंद कर ले। गोले पर अंरडी, बादाम, या केले की पत्ती लपेटकर पतले धागे से बांध दीजिये और उस पर काली मिट्टी का एक अंगुल मोटा लेप कीजिये। मिट्टी सूखने के बाद गोले को आग पर गरम कीजिये। जब गोला गरम होकर लाल सुर्ख हो जाये, तब आँच से हटाकर उसे ठंडा होने दे। ठंडा होने के बाद गोले पर से मिट्टी और पत्ते हटा कर गोला और सोंठ को पीसकर मिला दे। ये चूर्ण दस्त बंद करने के लिये लाभदाय इलाज है। 

पेचिश मे पथ्य-अपथ्य


  •  पेचिश 
  • छाछ, दही, मुंग की दाल, अनार का रस, इन पदार्थ का ज्यादा सेवन करना चाहिये। जब तक मरोड़ ख़त्म न हो, तब तक रोटी, पराठे, नमकीन, मिर्च-मसाले, अचार-चटनी, या तली, भुनी, पदार्थ से परहेज रखे। 

  1. मरोड़फल्ली, का चूर्ण रोगी को दिन मे तीन बार तीन ग्राम की मात्रा मे पानी के साथ या दही में मिलाकर देना चाहिये। 
  2. सोते समय अंरडी का तेल 1 चम्मच गरम पानी या दूध के साथ लेने से पेट में उठनेवाली पीड़ा शांत हो जाती है, मरोड़ मिट जाती है। 
  3. पेट में शूल उठने के साथ बार-बार शौच के लिये जाना पड़े और लगे की वायु फस गई है तो बेल, सोंठ, और लेंडी-पेपरी, का चूर्ण समभाग लेकर गुड़ और तेल के साथ मिलाकर सेवन करना चाहिये।
  4. हरड़ का चूर्ण 3-4 ग्राम दिन में 2 बार ठंडे पानी के साथ लेने से मरोड़ की शिकायत समाप्त हो जाती है।
  5.  मरोड़ में इसबगोल को दही या छाछ में मिलाकर लेने से लाभ होता है। 
  6. बबूल का गोंद 100 ग्राम राल 100 ग्राम व मिश्री 800 ग्राम इन तीनो को एक साथ कूटकर पीसकर छान ले। इसके बाद इन्हे पत्थर के खरल में 1 घंटे तक घोटाई करे, इस औषधी की 2-3 रत्ती या जीभ पर रखकर चूस ले पेचिश ठीक हो जाते है। 
  7. बड़ी हरड़ 100 ग्राम घी में भूनकर पीस ले। इसमें 100 ग्राम सोफ व 200 ग्राम मिश्री कूटकर मिला दे। इसे 10-15 ग्राम मात्रा में चावल के धोवन के साथ सेवन करने पर पेचिश में लाभ मिलता है। 
  8. सौंफ 50 ग्राम भून ले व उतनी ही सौंफ कच्ची पीस ले। इसमें मिश्री पीसकर मिलाये व 2-3 चुटकी दिन में 4-5 बार पानी के साथ सेवन करे। 
  9. बड़ी हरड़ का छिलका, सोंठ व सौंफ बराबर मात्रा में ले। अब सोंठ व बड़ी हरड़ को घी में भूनकर पीसे व सौंफ को अलग से पीसकर इसमें मिलादे सोते समय इस चूर्ण में पीसी चीनी मिलाकर 4 से 5 ग्राम तक पानी या दूध के साथ सेवन करे।
  • Digestive-system-prescriptions-and-disease-(part-2 )-paachan-tantr-ke-rog-va-nuskhe
  • धन्यवाद दोस्तों 

10/05/2018

Digestive system prescriptions and disease (part 1)

पाचन तंत्र के रोग व नुस्खे (भाग 1) 

Digestive-system-prescriptions-and-disease-(part-1)-paachan-tantr-ke-rog-va-nuskhe
नमस्कार दोस्तों 
Digestive-system-prescriptions-and-disease-(part-1),paachan-tantr-ke-rog-va-nuskhe,वमन,कपूर,उधर-शोधन,उधर-शूल,पेट-में-दर्द,हरीतकी-रसायन,पेट-व- जिगर-के-सभी-रोग,नुस्खे,पाचन-तंत्र,desi-health-tips,ayurved,health-tips,
Digestive system prescriptions and disease (part 1)

  • वमन  नारियल के ऊपरी छिलके या मक्का के डोडे की भस्म बनाकर कपडे से छानकर रख ले, वमन या उल्टी की स्थिति में शहद के साथ 1 ग्राम इसकी मात्रा लेनी चाहिये।
  • कपूर कपूर कचरी बारह भाग तथा स्वर्ण गैरिक एक भाग को पानी के साथ खरल में घोटकर मटर के बराबर गोलिया बना ले, इसे 2  से 6  गोलिया दिन में दो बार या आवश्यकतानुसार सेवन करे, यह गोली सभी प्रकार के वमन में उपयोगी है, सगर्भा की, ज्वर की, अल्सर की, अम्लपित्त की, इससे पर्याप्त लाभ मिलता है, उल्टी और दर्द दो दिन में खत्म हो जाता है.
  • उधर शोधन  एरंड तेल में छोटी हरड़ को भूनकर उसका महीन चूर्ण तैयार कर ले, यह चूर्ण कब्ज की उत्तम दवा है, एक छोटी चम्मच की मात्रा में रात में सोते समय गरम दूध या गरम पानी के साथ लेने से सुबह  पेट साफ होता है.
  • उधर शूल  पीपलामूल, सोंठ, छोटी पीपल, चव्य, को प्रत्येक 40 ग्राम व आँवला के रस में रखकर  बनाई गई लौह भस्म 640 ग्राम ले, अब इन सभी घटको का कपडा छन्नी चूर्ण बनाकर आठ गुना गोमुत्र डालकर लोहे की कड़ाई में मंद मध्यम और तेज आँच पर पकाये। गोली  बनने योग्य होने पर 125 मि.ग्राम की गोलिया बना ले, दो से चार गोली घी के साथ सेवन करनी चाहिये। यह औषधी मंदाग्नि, प्लीहा, गुल्म, व शूल की बीमारियों को नष्ट खत्म करती है.
  • पेट में दर्द  यदि पेट में अचानक दर्द उठे तो 3-4 ग्राम अजवाइन और थोड़ा सा नमक लेकर पानी के साथ ले, पेट दर्द में तुरंत आराम मिलेगा, हिंग्वष्टक चूर्ण, लवण भास्कर चूर्ण, शिवक्षार पाचन चूर्ण में से कोई भी 3-5 ग्राम की मात्रा में दिन में 3 बार पानी के साथ लेने से अपचन या उदरशूल में आराम गिरता है.
  • हरीतकी रसायन  छोटी हरड़ 8 भाग, सोंठ, सेंधा नमक, छोटी पीपर, शर्करा गुड़ 2 भाग, शहद उतना जितने में औषदि बन जाये। सभी द्रव्यों को कूटकर कपडा छन्नी चूर्ण बनाकर शहद मिलाकर अवलेह जैसा बना ले, रात को सोने से पहले एक तोला पानी या दूध के साथ सेवन करे, इसके सेवन से विभिन्न उदर रोग खत्म हो जाते है, पुराने जुकाम व वात रोगोँ में भी अतिशीघ्र आराम मिलता है.
  • पेट व जिगर के सभी रोग आलूबुखारा आधा किलो ग्राम, गुलाबजल दो किलो ग्राम, गुलाब के फूल आधा छटाक, सौफ आधा छटाक, सनाय की पत्ती एक छटाक, चीनी या गुड़ एक पाव, गुलाब जल में आलूबुखारे को रात भर भिगा दो, सबेरे उसे मसलकर गुठलिया फेक दो, अब गुलाब के फूल, सनाय की पत्ती व सौफ को कूटकर आलूबुखारा के घोल में मिला दे, इसमें गुड़ डालकर धीमी आँच पर तब पकाइये। जब तक की च्यवनप्राश बन जाये। एक छोटा चम्मच सबेरे-शाम भोजन के पूर्व खाना चाहिये। इससे पेट दर्द, गैस, कब्ज, आदि ठीक हो जाते है। जब पेट की शिकायत हो तो तभी इसे लेना चाहिये, अन्यथा नहीं।इस औषधि सेवन से दस्त की शिकायत होने लगे तो सनाय की मात्रा कम या सनाय को निकाल देना चाहिये।
  • Digestive-system-prescriptions-and-disease-(part-1)-paachan-tantr-ke-rog-va-nuskhe
  • धन्यवाद दोस्तों 

9/29/2018

Take these measures to relieve constipation from your body


अपने शरीर से कब्ज से छुटकारा पाने के लिये इन उपायो को ले

Take-these-measures-to-relieve-constipation-from-your-body-apane-sharir-se-kabj-se-chhutakaara-pane-ke-liye-in-upaayon-ko-le
नमस्कार दोस्तों 
कब्जियत में ईसबगोल का सेवन भी लाभदायक होता है। रात को सोते समय एक पाव लिटर दुध में 6-7 पेंडखजुर उबालकर पिये तो कब्ज में लाभ होता है, सर्दी-जुकाम के लिये भी यह फायदेमंद है। इसके अलावा चाहें तो दुध में दस-बारह मनुक्के उबालकर खाये और ऊपर से वही दुध पिया जाये तो सबेरे पेट अच्छा साफ होगा ही होगा और पुरानी से पुरानी कब्ज दुर करने में भी यह कारगर है.

Take-these-measures-to-relieve-constipation-from-your-body,apane-sharir-se-kabj-se-chhutakaara-pane-ke-liye-in-upaayon-ko-le,desi-health-tips,health-care,ayurveda,constipation,country-health-tip,
Take these measures to relieve constipation from your body

एक महत्त्वपुर्ण बात हरड, का सेवन करने से पहले। जब शरीर अत्यंत-थका-हुआ, या अत्यंत-दुर्बल, भुखा, प्यासा, अम्लपित्त-बढा-हुआ, या पित्त-कुपित्त, अवस्था में हो, तब हरड का सेवन नही करना चाहियें.
जुलाब लेने की आदत बहुत नुकसान देह साबित हो सकती है। बहुत जरुरी होने पर हल्ले जुलाब के तौर पर आप एरंडेल तेल के चार ते पाच चम्मच ज्यादा कठीण कब्ज हो तो सात आठ चम्मच याने सौ मि.ली. गरम पाणी या दुध में मिलाकर रात में सोते समय पिने से शौच साफ आता है.

कुछ उपचारों को सुविधानुसार अपनाते हुये सबेरे 4-5 कि.मी. पैदल चलने की आदत डालें। शरीर को चुस्त-स्फूर्ती रखने के लिये यह सर्वश्रेष्ठ उपायों में से है। योगासन शुरू में तकलीफदेह लग सकता है, पर कुछ समय बाद ठिक तरीके से अभ्यास हो जाने पर आनंददायक होता है।महत्त्वपुर्ण बात अलबत्ता, योगासन किसी योग जानकार से  सलाह लेकर ही करना चाहियें.

इनमें से एक-एक उपायों को अपनाने के कुछ दिनो के बाद आप को महसुस होगा कि हर समय परेशान करनेवाली कब्जियत आपसे बहुत दुर भाग जायेगी। कब्ज ही अधिकतर रोगों की जड है। यदी पेट में कब्ज की स्थिती न बनने पाये तो तमाम दुसरे रोगों सें बचा जा सकता है.

Take-these-measures-to-relieve-constipation-from-your-body-apane-sharir-se-kabj-se-chhutakaara-pane-ke-liye-in-upaayon-ko-le

धन्यवाद दोस्तो

9/25/2018

Take away these constipation from your body

अपने शरीर से इन कब्ज को दूर करो

Take-away-these-constipation-from-your-body-apane-shareer-se-in-kabj-ko-door-karo
नमस्कार दोस्तो
कब्ज मे सुधार चाहते हो तो भोजन मे महत्त्वपुर्ण सुधार करना। भाजी, सलाद, हरी-शाक, और रेशेदार, पदार्थ का भोजन मे इस्तेमाल बढाना चाहियें। छिलकायुक्त-दाल, चोकर-युक्त-आटे-की-रोटियाँ, अंकुरित-अनाज, अपने शरीर मे इन पदार्थो से पौष्टिकता तो मिलती है, और आँतो की सक्रियता भी बढती है। साथ हि साथ पाणी का भी भरपुर इस्तेमाल करना चाहिये 7-8 ग्लास पाणी पिया जाये तो अच्छा है। हप्ते मे एक दो दिन का उपवास करे और एनिमा के इस्तेमाल से कब्ज ही क्या, अन्य प्रकार रोगो से आप बचे रह सकते है। सबेरे शौचालय जाने से पहले एक बडा गिलास पाणी जरूर पियें। इससे आँतो का काम आसान हो जायेगा.


Take-away-these-constipation-from-your-body,apane-shareer-se-in-kabj-ko-door-karo,desi-health-tips,contipation,healthtips,
Take away these constipation from your body

कब्ज के रोगीयो को अमरूद-के-मौसम, मे सबेरे पाव भर अमरूद खाना चाहिये, अच्छा लाभ मिलेगा। गरमी के मौसम पके बेल-का-शरबत, सबेरे या दोपहर भोजन के तिन-चार घंटे बाद पिये। अन्य मौसम दिनों मे भोजन के बाद पका-पपीता, खाईये कब्ज सहित पेट के अन्य तरहा के रोगों में अतिशय लाभ मिल सकता है। इसके अलावा नीबुं, आँवला, भुने-चने, छाछ, आदि चीजों का सेवन से पेट कि विभिन्न प्रकार के बीमारीयाँ से बचा जा सकता है.

हरड, का सेवन कब्ज भगाने का अच्छा उपाय है। हरड एक माँ के समान शरीर की देखभाल करती है। हरड के सेवन के फायदे ही फायदे है, नुकसान कुछ भी नही। रोज रात मे सोते समय छोटी काली-हरड, का चूर्ण खाईये और कब्ज को अपने शरीर से दुर भगाईये। चाहें तो जब मन मे आये तो दो-चार तुकडे मुहँ मे डालकर चुसते रहिये। नियमित सेवन से आपकी यौवन-शक्ती, ज्यादा दिनों तक बरकरार  रहेगी और रोग-प्रतिरोधक-शक्ती, बढेगी.

Take-away-these-constipation-from-your-body-apane-shareer-se-in-kabj-ko-door-karo

धन्यवाद दोस्तो

9/22/2018

Important information about constipation

कब्ज के बारे मे महत्त्वपुर्ण सुचना

Important-information-about-constipation-kabj-ke-baare-mein-mahatvapoorn-jaanakaaree-desi-health-tips-ayurveda
नमस्कार दोस्तो मौजुदा हालात में अगर रोगियों का वर्गीकरण किया जाये तो सबसे ज्यादा जिस रोग के लोग मिलेंगे, वह है कोष्ठबध्दता, यानी कब्जियत। आजकल के अप्राकृतिक आहार-विहार का अनिवार्य नतीजा है। मैदायुक्त पदार्थ जैसे कचौरी, समोसे, पुरी, पाव, बिस्कीट, तली-भुनी चीजें और तमाम तरहा के व्यंजन और श्रम हिन अनियमितता दिनचर्या, ये सब कोष्ठबध्दता के प्रधान कारण है। भोजन में रेषाविहीन चीजों को ज्यादा स्थान देने से और शरीर को पर्याप्त श्रम न करने के कारण आँतो कि सक्रियता कम होती है।


Important-information-about-constipation,kabj-ke-baare-mein-mahatvapoorn-jaanakaaree,desi-health-tips,ayurveda,
Important information about constipation

शरीर को पर्याप्त गतिशील न रखा जाये तो जठर में पाचक रसों का भी पर्याप्त स्राव नही हो पाता। नतिजन, आहार की पाचन क्रिया मंद हो जाती है। और मल निष्कासन का काम बाधित होकर कोष्ठबध्दता की शुरुवात हो जाती है। कोष्ठबध्दता के नाते ही आँतो में मल सडकर विष बनता है और सारे रक्त को दुषित करता है। इस तरहा से और तमाम रोग उत्पन्न होते रहते है। इसी लिये आयुर्वेद मे कुपित मल को अधिकतर रोगों की जड कहा गया है.



इसके अलावा कब्ज का एक कारण ज्यादा मानसिक तान भी है। यदी हम मानसिक तनाव की स्थिती से गुजर रहे हों तो इसका असर पाचन संस्थान पर निश्चित रूप से पडता है। जठर में पाचक रसो का स्राव कम होने लगता है और पाचन क्रिया मंद हो जाती है। कुछ ऐसे उपाय है, जिनको आप अपने कोष्ठबध्दता की स्थिती से बचा जा सकता है। इस संबंध में पहली बात तो यह है कि हमें आहार को अच्छी तरहा से चबाकर खाना चाहिये। मतलब ठोस चीजों  को इतना चबाइये कि निवाला पिने लायक बन जाये। दाँतो का काम आँतो से नही लिया जाये तो अच्छा है।

यदी दाँतो का काम आँतो पर डाला जायेगा तो निश्चित हि रुप से आँतो कमजोर होगी और कोष्ठबध्दता जैसी बिमारिया पैदा होगी.

Important-information-about-constipation,kabj-ke-baare-mein-mahatvapoorn-jaanakaaree,desi-health-tips,ayurveda,

धन्यवाद दोस्तो

9/19/2018

What is the right way of food

भोजन का सही तरीका क्या है

What-is-the-right-way-of-food-bhojan-ka-sahee-tareeka-kya-hai-desi-health-tips-ayurveda-healthcare-dinner
नमस्कार दोस्तो
खुर्ची कार्यालय आदी में काम करने वाले लोगों के लिये हाथ धोने से बचने के लिये कई बार छुरी या चम्मच से खाना सुविधा जनक होता है, परंतु सच्चाई यही है कि हाथ से खाना ही सही मायने मे फायदे मंद होता है। हाथ से निवाला बनाते समय भोजन के तापमान की सुचना अपने शरीर को पहले ही मिल जाती है। और आँते भोजन को पचाने के लिये तैयार हो जाती है.
What-is-the-right-way-of-food,bhojan-ka-sahee-tareeka-kya-hai,desi-health-tips, ayurveda,healthcare,dinner,rightway-food-service-login, dickerson-foods-marion-ohio, fruit-distributors-lima-ohio, eating-fruits-after-meal, eating-fruit-after-meal-myth, best-time-to-eat-fruits-to-lose-weight, how-to-eat-food-wikihow, eating-banana-after-meal,भोजन-को-पचाने,त्वचा,मुँह,आयुर्वेद,ऊर्जा,दही,कफकारक,फेफडो-में-संक्रमण,सर्दी-जुकाम,
What is the right way to food

इससे भोजन आसानी से पचता है। हाथ की त्वचा को भोजन के तापमान का अंदाज हो जाने से निवाला मुँह मे डालते समय मुँह जलने का जिभ जलने का खतरा नही रहता। छुरी चम्मच से खाने पर भोजन के तापमान का ठिक से अंदाज नही हो पाता.

इसके अलावा आयुर्वेद के अनुसार शरीर पाच तत्त्वों से मिलकर बना है धरती, आकाश, जल, वायु, और अग्नी। यदि इन पाचों तत्त्वों का शरीर में असंतुलन हो तो कई तरहा के रोग होने लगते है। हाथ की उँगलियों के सहारे निवाला बनाते समय जो मुद्रा बनती है, उससे पाचों तत्त्वों का संतुलन बना रहता है और शरीर में ऊर्जा का स्तर बनाये रखने में मदत मिलती है.

रात मे दही खाना क्या नुकसानदेह होता है
आयुर्वेद के अनुसार रात में दही खाने से बचना चाहीये। असल मे दही कफकारक होता है। रात में हम भोजन के बाद मेहनत वाले काम करने के बजाय कुछ देर बाद सो जाते है। ऐसे मे दही की कफकारक प्रकृती उपद्रवी असर पैदा करती है.

दिन मे सुर्य के प्रभाव और श्रम की स्थिती में जो दही हमारी पाचन क्षमता बढाता है, वही रात में नुकसानदेह बन जाता है। इसके अलावा फेफडो में संक्रमण हो, सर्दी जुकाम की स्थिती हो, शरीर में कही सुजन हो तो दही का सेवन से बचना चाहिये.

What-is-the-right-way-of-food,bhojan-ka-sahee-tareeka-kya-hai,desi-health-tips,ayurveda,healthcare,dinner,

धन्यवाद दोस्तो

9/18/2018

Raw fruits vegetables, how appropriate it is for the human body

कच्चे फल सब्जिया यह मानव शरीर के लिये कितना उचित है

Raw-fruits-vegetables-how-appropriate-it-is-for-the-human-body-kachche-phal-sabjiyaan-maanav-shareer-ke-lie-kitana-uchit-hai-desi-health-tips-ayurveda-healthcare
नमस्कार दोस्तो
उचित-अनुचित से ज्यादा महत्त्वपुर्ण सवाल संभव-असंभव का है। यह सही है कि प्रकृती ने सारे जीव-जंतुओ के लिये कच्चा आहार ही उपलब्ध कराया है। हम मनुष्य ने बुध्दी का इस्तेमाल करके पकाने की कला अवगत कर ली है। और चीजो को स्वादिष्ट बनाने मे महारत हासील कर ली है। जाहीर सी बात है, इसे प्राकृतिक तो नही कहा जा सकता, हा जिस देश-दुनिया के माहौल मे हम रह रहे है, उसमे कच्चा खाकर रह पाना भी आसान नही है.

Raw-fruits-vegetables-how-appropriate-it-is-for-the-human-body,kachche-phal-sabjiyaan-maanav-shareer-ke-lie-kitana-uchit-hai-desi-health-tips-ayurveda-healthcare
Raw fruits vegetables, how appropriate it is for the human body
यदी फल-सब्जिया जैविक तरीको से बगैर रासायनिक खादों और दवाओं से उगाई गई हो, तो कच्चा अहार निश्चित ही रूप से सेहत के लिये वरदान हो सकता है। एलोपैथी डॉक्टर पुरी तरहा से कच्चा अहार अपनाने कि मनाई करते है, उसका कारण यह है कि चिकित्सा-विज्ञान की पढाई ही पके भोजन को आधार मानकर की जाती है। अधिकतर औषधी भी इसी हिसाब से बनी है। लेकिन यह आश्चर्यकारक सत्य है कि आप हिम्मत करके साल-दो साल पुरी तरहा कच्चा अहार पर रह जाये तो हो सकता है, आपकी बिमारिया भी जादुई ढंग से ठिक हो जाये.

रोगो की मार से हार रहे लोगो को यह सलाह दी जा सकती है  की वे एक बार किसी प्राकृतिक-चिकित्सा कि सलाह लेकर कच्चा अहार आजमा सकते है। यह अवश्यक ध्यान देने वाली बात है की कच्चा अहार शुरू करने पर आपके शरीर मे धिरे-धिरे  उपद्रव दिखाई पड सकते है। इसकी वजह है की हमारे शरीर को पके भोजन की आदत होती है। लेकिन कुछ महिने बाद आपके शरीर को कच्चे अहार के प्रती खुद संतुलित करता है। और फिर आप कच्चा अहार मे आनंद और स्फूर्ती महसुस करने लगते है.

धिरे धिरे आपकी बिमारिया रोग आपसे दुर होने लगते है। कच्चा अहार भले ही नही संभव हो तो आप अपने भोजन मे कच्ची चीजों ज्यादा से ज्यादा शामिल करना चाहिये, ताकी रोगो से आपकी रक्षा हो सके। कच्ची चीजों मै विटामिन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है.

Raw-fruits-vegetables-how-appropriate-it-is-for-the-human-body-kachche-phal-sabjiyaan-maanav-shareer-ke-lie-kitana-uchit-hai-desi-health-tips-ayurveda-healthcare

धन्यवाद दोस्तो...

9/13/2018

When and what food dinner and breakfast

भोजन व नास्ता कब और क्या हो

when-and-what-food-dinner-and-breakfast-kab-aur-kya-khaana-raat-ka-khaana-aur-naashta-desi-health-tips-ayurveda-healthcare
नमस्कार दोस्तो
सबेरे सबसे पहले शौचादि से निवृत होने के बाद आसन-व्यायाम से 15, 20 मिनट पहले सबेरे के समय एक ग्लास पाणी में एक-दो चम्मच शुद्ध शहद और एक छोटा नीबुं निचोडकर पिना भी अच्छी आदत है। इससे शरीर से विषाक्ताता आसानी से बाहर हो जाते है। धमनिया का लचीलापन बना रहता है, और ह्रदयरोग की संभावना कम होती है। स्थुल शरीरवाले लोग सामान्य पानी कि जगह गुनगुना पानी ले.

when-and-what-food,dinner-and-breakfast,kab-aur-kya-khaana,raat-ka-khaana-aur-naashta,-desi-health-tips-ayurveda-healthcare
food dinner and breakfast
आसन-व्यायाम करने बाद 15-20 मिनट के बाद शरीर शांत हो जाने पर नास्ता करना चाहीये। नास्ते में मौसम के फल हो तो सबसे अच्छी बात है। लेकीन नास्ते मे पराठे, पुरी जैसी चीजो को शामिल करना आपकी दिनचर्या को आलस्य भरा बनाती है। नास्ते मे तली, भुनी, तैलीय पदार्थ कभी-कभार शौकिया तौर पर ही ले, हमेशा ध्यान रखना चाहिये कि नास्ता को हलका ही लेंना उचित है.

नास्ता के बाद कम से कम तीन घंटे बाद भोजन करना उचित है। दोपहर का भोजन 11-12 बजे तक और रात का भोजन 7-8 बजे तक कर लेना चाहीये। सोने से पहले ठंडे दुध में दो चम्मच शहद मिलाकर पिये। दुबले पतले लोग विषम मात्रा मे शहद और घी मिलाकर दुध ले सकते है। विषम मात्रा याने शहद के दो चम्मच तो घी एक चम्मच, घी के दो चम्मच तो शहद एक चम्मच। रात का भोजन किसी कारण न हो तो दुध मे शहद मिलाकर पिकर सो जाये।

महत्त्व पुर्ण बात ये है की कम खाकर लोग उतना बीमार नही पडते जितना कि ज्यादा खाकर, रात का भोजन हलका होना चाहिये। भोजन के अलावा विभिन्न प्रकार फल सलाद आवश्य शामिल करना चाहियें। शरीर को विटामिन कच्ची चीजों से ही मिलती है.

when-and-what-food-dinner-and-breakfast,kab-aur-kya-khaana-raat-ka-khaana-aur-naashta,desi-health-tips,ayurveda,healthcare,

धन्यवाद दोस्तो


9/12/2018

The elderly thinks bad is the habit of shaking the legs

बुजूर्ग बुरा मानते है बे वजहा पैर हिलाने की आदत को

The-elderly-thinks-bad-is-the-habit-of-shaking-the-legs-bujoorg-bura-maanate-hai-be-vajaha-pair- hilaane-kee-aadat-ko-desi-health-tips-ayurveda-healthcare
नमस्कार दोस्तो चलो जानते है क्या नुकसान हो सकता है
हा बे वजहा पैर हिलाने की आदत का सेहत से गहरा संबंध है। बुजुर्गो की कहावत अब विज्ञान भी सही सिद्ध कर रहा है। अध्ययनों के अनुसार बेवजह पैर हिलाने की आदत से हार्ट अटैक का खतरा दोगुना बढ जाता है। नाहक पैर हिलाते रहने से दिल की बीमारी बिन बुलाये आपके गले पड सकती है। चिकित्सा-विज्ञानयो कें अनुसार पैर हिलाने की समस्या वास्तव में नींद कम आने की समस्या से सीधे तौर पर जुडी हुई है। पीडित व्यक्ती नींद आने से पहले दो सौ से तिन सौ बार अपना पैर हिला चुका होता है।

the-elderly,thinks-bad,is-habit-of-shaking-the-legs,moving-legs,desi-health-tips-ayurveda-healthcare
shaking the legs
इससे ब्लडप्रेशर और ह्रदय की धडकन बढ जाती है और यही दिल की बीमारी का बडा कारण बन जाती है। वजन, नशा, उम्र ब्लडप्रेशर के साथ जोडकर देखने से बे वजहा पैर हिलाना कई बार और भी खतरनाक हो सकता है। पैर हिलाने की आदत हो तो इसे नजर अंदाज न करे और जरूरत पडे तो इससे निजात पाने के लिये चिकित्सकीय परामर्श कर लेना.  

ज्यादा देर तक बैठकर काम करना नुकसानदेह साबित होता है 
ज्यादा देर तक बैठकर काम करने से सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिन्हे कुर्ची पर बैठकर काम करने की मज़बूरी हो, उन्हें भी हर दो घंटे के अंतर पर कम-से-कम दस मिनट के लिये खड़े होकर चहलकदम कर लेनी चाहिये, कुर्सी पर बैठकर कुछ योग क्रिया का अभ्यास करके भी शरीर को हरकत दे सकते है, अन्यथा बवासीर,सर्वाइकल,जैसी अन्य प्रकार बीमारिया बड़े आराम से अपनी चपेट में ले सकती है,लगातार आठ घंटे तक कुर्सी बैठे रहने से आपकी उम्र भी घट सकती है, आप बैठकर काम करते हो या खड़े होकर, ज्यादा लंबे समय तक लगातार काम करना भी सेहत के लिये अच्छा नहीं रहता,शरीर को जीतनी आराम की जरूरत है, उतनी जरूरत काम की भी है.  

The-elderly-thinks-bad-is-the-habit-of-shaking-the-legs,bujoorg-bura-maanate-hai-be-vajaha-pair-hilaane-kee-aadat-ko,desi-health-tips,ayurveda,healthcare,

धन्यवाद दोस्तो

9/06/2018

Control the tridosha in the kitchen-rasoighar mein tridosh ko niyantrit kare

आज जानेंगे अपने रसोईं घर मे कैसे त्रिदोष पर नियत्रिंत कर सकते है 

Control-the-tridosha-in-the-kitchen-rasoighar-mein-ridosh-ko-niyantrit-kare-desi-health-tips-ayurveda-healthcare
नमस्कार दोस्तों
आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ के अनुसार रोग तीन तरहा के होते है, अंतर्जात, बहिर्जात,मानस रोग। अंतर्जात रोग वह है, जो वात, पित्त,कफ के असंतुलन से होते है। बहिर्जात रोग वह है, जो की प्रदूषण, विष, जीवानु-विषाणु, आदी से उत्पन्न होते है। मानस रोग वह है, जो की मनुष्य के मनोकुल काम न होने के कारण उत्पन्न होता है। वैसे तो अलग-अलग दिखनेवाले इन तीनो रोगो में आपस में बहुत ही घनिष्ट अंतर्सबंध है। 


Control-the-tridosha,in-the-kitchen,rasoighar-mein,ridosh-ko-niyantrit-kare,desi-health-tips-ayurveda-healthcare
Control-the-tridosha
जब शरीर में असंतुलन अंतर्जात बिमारिया होती है, तो वह बहिर्जात बिमारियो के लिये रास्ता बनाती है, कारण अंतर्जात बिमारियो से शरीर भीतर से इतना कमजोर पड जाता है, की बहिर्जात बिमारियो का सामना नहीं कर पाता है, इस तरहा से बहिर्जात कारणों से होनेवाली व्याधियाँ बिगाडने का काम करती है। इसी प्रकार से मानस रोग भी शरीर में त्रिदोष संतुलन को प्रभावित करता है.

बिना वात में गडबडी आये पित्त व कफ असंतुलित नही होता, वात में सबसे पहले आसानी से गडबडी इसलिये होती है, कि इसका जन्म वायु और आकाश से है, इन दोनो मे कोई भी हलचल होती है तो, वात असंतुलन हो जाता है। स्मरण रखे कृत्रीम रसायनो से ज्यादातर खाद्य पदार्थ वातकारी बन जाते है.

मनुष्य का शरीर सामान्य तौर पर अपनी प्रकृती के अनुसार ही भोजन ग्रहन करती है। जैसे की किसी खाद्य पदार्थ का प्रभाव वात, पित्त व कफ या मिश्रित प्रकृती की अलग-अलग स्थितीयों में शरीर पर अलग-अलग हो सकता है। जैसे की पित्त-प्रकोप से ग्रस्त व्यक्ती के लिये फुलगोभी नुकसान साबित कर सकती है, पर वही फुलगोभी वात-कफ वाले व्यक्ती के लिये फायदेमंद या कारगर साबित हो सकती है.

इस तरहा से देखो सेहत बनाये रखने के लिये हमे हमेशा अपने शरीर की वात, पित्त, कफ इन तिनो की मिश्रीत प्रवृत्ती की जानकारी होना जरुरी है और खाद्य पदार्थ के मुल जानकारी होना भी जरुरी है। अपनी मुल प्रकृती के अनुसार आहार-विहार अपनाये और त्रिदोषों का तालमेल रखें तो तमाम बिमारियो से आप बच सकते है, बिगडे वात-कफ वाला व्यक्ती आलु खाने का शौकीन है तो निश्चित रुप से अपनी प्रकृती को और ज्यादा असंतुलन करने का काम करेगा.

महत्त्व पुर्ण बात वही आलु के साथ टमाटर, लहसुन, अद्रक थोडा सा सेंधा नमक मिलाया जाये तो आश्चर्यजनक से वात-कफ को बढने से रोखा जा सकता है, अरहर की दाल मे देशी घी, जीरा, लहसुन, हिंग, आदी का बगार लगाने से दाल खुश्क प्रकृती के काबु मे करने का यह जबरदस्त उपयोग है.

अपने रोजमर्रा के भोजन मे संतुलन बैठाना कोई मुश्कील बात नही है, अपने देश की परंपरागत रसोई में त्रिदोष संतुलन को बनाये रखनेवाले सैकडो नुस्खे मौजुद है.

Control-the-tridosha-in-the-kitchen,rasoighar-mein-ridosh-ko-niyantrit-kare,desi-health-tips,ayurveda,healthcare,

धन्यवाद दोस्तों 

9/04/2018

Symptoms of cuff Cough and how to surviv-kaf ke lakshan aur kaise bachen

कफ के लक्षण और कैसे बचे

Symptoms-of-cuff-Cough-and-how-to-surviv-kaf-ke-lakshan-aur-kaise-bachendesi-health-tips-ayurveda-healthcare-tridhosh
नमस्कार दोस्तो आज कफ के बारे मे जान लेते है, कप ठोस, मृदु, चिकना, भारी, और ठंडा होता है, यह पृथ्वी और जल के संयोग से बना है, कफ के कारण ही हमारे शरीर में मजबुती, स्निग्धता, और स्वभाव में सहनशीलता, धैर्य, क्षमाशील, आदी गुण पैदा होते है, हमारे शरीर में दृढता का आधार कफ ही है.
कफ प्रकृतीवाले लोग मस्त तबीयत वाले लोग होते है, और सुदृढ शरीरवाले होते है, हल्की-फुल्की लापरवाही उनका कुछ नही बिगाड पाती, इसलिये अन्य प्रकृतीवाले की तुलना में ज्यादा स्वस्थ होते है, और कम बिमार पडते है, कोई भी काम आराम से करना चाहते है, आलस्य उन पर जल्दी हावी होता है।

Symptoms-of-cuff,Cough-and,how-to-surviv,kaf-ke-lakshan,aur-kaise-bachen,desi-health-tips-ayurveda-healthcare-tridhosh
Symptoms-of-cuff
महत्त्वपुर्ण बात आलस्य कफ पवृत्तिवालों का सबसे बडा दुश्मन होता है, आलस्य कफ प्रवृत्ती असंतुलन का कारण बनती है, भोजन मे या नास्ता मे ज्यादा मिठा, नमकीन, तैलीय, और पचने मे गरिष्ट भोजन कफ-वृद्धी के कारण है.

यदी तंद्रा-निद्रा ज्यादा सताये, शरीर-में-भारीपन-लगे, थकान ज्यादा हो, मितली की प्रवृत्ती, आँखों मे सफेदी, गले में खराश, शरीर में ठंड की लहरी, आये तो समझ लेना की कफ असंतुलन पैदा हो गया है.
कफ प्रकृती के लिये गरम, तिखा, कडवा, और रूक्ष-आहार, अनुकुल पडता है। आप दिन में सोते होगे तो ये आदत छोडनी होगी, येसे लोगो को व्यायाम, योग, क्रिया करने से काफी राहत मिलती है, कफ और पित्त दोनों ही शांत हो जाते है.

इसी तरहा समय, वातावरण, मौसम, त्रिदोषों को प्रभावित करता है, सुबहा समय कफ, शाम समय को वात, दोपहर समय और रात समय को पित्त का प्रभाव प्रबल रहता है, और जानते है, तिनो ही ऋतु मे अलग अलग प्रभाव पडता है, जैसे बसंत व शीत मे कफ, पतझडग्रीष्म के कुछ समय के लिये पित्त और वर्षा ऋतु मे वात प्रबल होता है, जगंल मे वात, रेगिस्तान मे वात-पित्त, पर्वतीय क्षेत्रो मे वात-कफ, खाडी क्षेत्रो मे कफ-पित्त व मैदानी क्षेत्रो मे त्रिदोषों का सम प्रभाव रहता है, इसी तरहा बचपन मे कफ, जवानी मे पित्त,और बुढापे मे वात का प्रभाव रहता है, बच्चो मे शितल और निश्छल स्वभाव, जवानी-मे-उत्तेजना, बुढापे मे दर्द भरा शरीर, इन तिनो मे त्रिदोषों के प्रभाव पहचाने जा सकते है.

प्रकृती को समजते हुये कुछ सावधानियाँ रखें तो तमाम बीमारीयाँ से अपने शरीर को बचाया जा सकते है.

Symptoms-of-cuff-Cough-and-how-to-surviv-kaf-ke-lakshan-aur-kaise-bachendesi-health-tips-ayurveda-healthcare-tridhosh

धन्यवाद दोस्तो.....

9/01/2018

Fasting how and benefits-upavaas kaise kare isake phaayade

 उपवास कैसे करे इसके फायदे जानते है 

Fasting-how-and-benefits-upavaas-kaise-kare-isake-phaayade-desi-health-tips-ayurveda-healthcare-tridhosh
नमस्कार दोस्तों
अपने देश मे बुजुर्गो की एक बुद्धिमत्ता सोच रही है। जो वास्तव मे स्वास्थ्य-आयुर्वेद और आयुर्वेद-चिकित्सा का मिलाप है. अपने समाज मे तमाम परंपराये जो स्वास्थ्य-विज्ञान के तहत शुरु हुई थी, पर आज हमने वह परंपरा विकृत कर दि है. असल मे भारतीय-जीवनशैली मे इस प्रकार की आहार-विहार से जुडी पुरानी परंपराओ का मुख्य निर्देशांक रहा है। व्रत उपवास और विभिन्न तरह के शुभ अवसरो पर किये जानेवाले व्यवस्थाये निर्धारित की गई, जैसे शुभ अवसरो पर हल्दी, बेसन, चंदन, उबटन लगाने की परंपरा है.


Fasting-how-and-benefits,upavaas-kaise-kare,isake-phaayade,desi-health-tips-ayurveda-healthcare-tridhosh
                Fasting-how-and-benefits

आयुर्वेद में निर्जल उपवास, पुर्ण उपवास मानव शरीर के लीये  नुकसानदेह माना गया है। (निर्जला या पुर्ण उपवास से वात वृद्धि होती है)। उपवास करो लेकीन उसके साथ फल, दुध, फलोका जुस, शुद्ध और हलका पेय  का सेवन करना चाहीयेसामान्य दिनचर्या से अलग जनसामान्य के स्वास्थ्य कि रक्षा हो सके। आज हर तरफ अपने देश मे आयुर्वेद-चिकित्सा सेवाओ कि कमी है। यह महत्वपुर्ण बात है की जिन पंचमहाभूतो से हमारा शरीर निर्माण है, हमारे बुजूर्गो ने पुरखो ने उन्हे अलग अलग देवताओ के रुप मे पुजनिय बना दिया है। इसके अलावा अपने परंपराओ मे व्रत उपवास विधान से शारीरिक और मानसिक दोनो ही तरह कि स्वास्थ्य रक्षा का इंतजाम करके रखा है।

महत्वपुर्ण बात ये है। कभी भी निर्जला या पुर्ण उपवास न करेयह भी गौर करनीवाली बात है। हनुमानजी वायु से उत्पन्न देव है, उनका उपवास मंगलवार के दिन किया जाता है, हनुमानजी वायु से उत्पन है, तो उनका संबंध वायु से आता है। इस व्रत मे आप फल और दुध ले सकते है, और नमक का परहेज किया जाता है, पुरे दिन मे आप एक बार भोजन अन्नाहार कर सकते है। इससे आपको होने वाले आतंरीक शुद्धी और शरीर मे वात-संतुलन की दृष्टी से ही है.

शुक्रवार के दिन संतोषी माता का व्रत-उपवास किया जाता है, इस उपवास मे खट्टा परहेज होता है। इस उपवास मे नमक चलता है। दरअसल खट्टा पित्त-प्रकोप का कारण है। यह भी महत्वपुर्ण है की पित्त का संबंध बुद्धी से होने के नाते, पित्त असंतुलित हो तो बुद्धी भी विचलीत होगी। इस तरहा संतुलित पित्त के परिणाम संतोष-भाव पित्त-संतुलन की दृष्टी से ही है. नवरात्र-अन्य व्रत उपवास भी शरीर-शोधन की दृष्टी से महत्वपूर्ण है.

Fasting-how-and-benefits,upavaas-kaise-kare-isake-phaayade,desi-health-tips,ayurveda,healthcare,tridhosh,

धन्यवाद दोस्तों 

8/31/2018

How bile (gall) is work-kaise pitt kaam karata hai

आज बात करते है, पित्त के बारेमे जानते है

 
How-bile-is-work-kaise-pitt-kaa-karata-hai-desi-health-tips-ayurveda-healthcare-tridhosh

नमस्कार मित्रो
पित्त अग्नी से बना है तो इसका असर भी अग्नी जैसा है।भुख, प्यास, शरीर कि गरमी, बुद्धिमत्ता, कामावेग, इत्यादी के लिये शरीर के लिये उत्तरदायी होता है। अग्नी का गुण गरमी जलन शरीर में कही भी गरमी और जलन महसुस हो तो समजलेना की पित्त बढा है। हथेली, आँखो, पेशाब, इत्यादी मे जलन हो रही है तो समज लेना पित्त की सुरवात हो रही है.


How-bile,is-work-gall,kaise-pitt-kaam-karata-hai,desi-health-tips-ayurveda-healthcare-tridhosh
                                 How-bile-is-work
एसिडिटी अल्सर भी बढे पित्त का परिणाम है। पित्त-असंतुलन लिवर में पहुचे तो पिलीया होता है। गुरदे, गर्भाशय, में पहुचे तो ये अंग बेकार हो जाते है। खुन तक पहुचता है तो चर्मरोग, खुजली होती है, सावध हो जाना.
पेशाब, पसीने मे या शरीर मे कही पीलापन है और शरीर पर लाली है तो पित्त असंतुलन है समज लेना।
पसीना, सास, डकार, अपानवायु, बदबु जादा बढे तो पित्त का उद्रेक है। शोक, भय, क्रोध, ईर्ष्या जैसी भावना ओं को काबु मे रखना चाहियें। कैंसर जैसे रोग पित्त बढने के कारण ही होते है। जैसे वात का संबंध मन से है, वैसेही पित्त का संबंध बुध्दी से है। यदी पित्त ज्यादा असंतुलन में आ जाये तो आदमी पागल भी हो सकता है.
पित्त को संतुलित रखने के लिये तैराकि जैसे व्यायाम करने चाहीये, पहाडों कि सैर, झील के किनारे चहल करना, चने का भुट्टा आदी पित्त शांत करने में कारगर है.

और पित्त प्रकृतीवाले को मिठा, कटु, कसैले,ठंडे पदार्थ अनुकुल है, चंदन, चिकनी मिट्टी आदी ठंडी चीजो का अनुलेप, शीतल जल से स्नान, तेल मालिश आदी पीत्तवाले लोगो के लिये विशेष लाभदाई है। पित्त प्रकृतीवाले लोग गरमी के प्रती असहिष्णु होते है। इन बातो को ध्यान मे रखते हुये पित्त प्रकृती के लोग अपना अच्छा स्वास्थ्य हासिल कर सकते है.

How-bile-is-work,kaise-pitt-kaa-karata-hai,desi-health-tips,ayurveda,healthcare,tridhosh,

धन्यवाद दोस्तो 

8/28/2018

How do tridefect work air vatha-tridosh kaise kaam karate hai vaat

त्रिदोष कैसे काम करते है वात 

how-do-tridefect-work-air-vatha-tridosh-kaise-kaam-karate-hai-vaat-desi-health-tips-ayurveda-healthcare-tridhosh
नमस्कार मित्रो
अब बात करते है आहार कैसे अपनाये त्रिदोष पंचभुतों का रुप है, वात आकाश और वायु से बना है, इसका प्रभाव वायु और आकाश हैपित्त अग्नि से बना है, इसका प्रभाव अग्नी जैसे हैकप की उत्पत्ती जल और पृथ्वी से हुई है, इसका प्रभाव जल और पृथ्वी के गुण से प्रभाव है। ये पाँचो तत्व ऊर्जा के विविध रुप है.
संसार के हर व्यक्ती की मुल प्रकृती का इन्ही त्रिदोषों द्वारा निर्धारित है। यदि अपनी प्रकृती की पहचान करते है तो आहार-विहार कि कुछ सावधानियाँ की जाये तो आसानी से स्वास्थ्य जीवन जिया जा सकता है.


how-do-tridefect,work-air-vatha,tridosh-kaise-kaam-karate-hai,vaat,desi-health-tips-ayurveda-healthcare-tridhosh
                 how-do-tridefect-work
शरिर की अधिक तर बीमारीयाँ असंतुलीत वात के कारण से पैदा होती है, जिस तरहा वायु से पृथ्वी पर जीवन संभव होता है, इस तर हा से वात दोष के बगैर पित्त और कफ दोष नही हो सकते.

वायु से गती वात का भी एक लक्षण है गती, शरीर कि सभी गतियों का संचालक वात होता है। शरीर के किसी भाग मे गती मे रुकावट बन जाती है तो, उस वक्त समजलेना चाहिये की वात असंतुलित हो रहा है। यदी ह्रदय की धडकन में गडबडी ह्रदय को ज्यादा ताकद लगानी पडती है तो, इसका मतलब ये है कि वात बढ रहा है. चाहकर भी कोई व्यक्ती चीडचीड अशांत है। तो इसका मतलब वात असंतुलित है. वात का दुषप्रभाव लकवा, पार्किंसन, अकडन, बढे हुये वात के परिणाम है.

हमारा शरीर हमारे मन से गतिमान है, इसलिये वात का संबंध भी मन से है, मानसिक व्याधियों मे वात का कुछ न कुछ प्रभाव पडता है। ऐसा व्यक्ती मन की शक्ती कल्पनाशीलता के इस्तेमाल से किए जाने वाले अनेक कामो मे अपनी प्रतिभा प्रमाणीत कर सकते है. 

वात का और एक लक्षण सुखापन
बडी आँत वात के मुख्य स्थान है। मलाशय यहा बढे हुए वात का प्रभाव मल के सुख जाने, कडक हो जाने बाद या कब्ज के रुप मे दिखता है। दुबले, पतले, लोग साक्षात वात के रोगी होते है। त्वचा, होठ, एडिया फटना वात किही लक्षण है.

वायु और आकाश दोनो की प्रकृती ठंडी है, जब ठंड बढती है तो वात-प्रधान व्यक्ती का वात प्रकोप भी बढने लगता है, आधुनिक जगत मे फ्रिज का इस्तेमाल बहुत जादा बड गया है, फ्रीज मे रखी चीजें सलामत तो रहती है, पर उनका प्रभाव वातकारी होता है.

खाली जगह मिलनेपर वायु की घुसपैठ करती है, इसी तरहा अपने शरिर में खाली स्थान पाते ही वात की घुसपैठ सुरु हो जाती है, सोने से पुर्व नाक में गाय का घी डालने से वात संतुलन के लिये बहुत महत्वपूर्ण बात है। और नाक में गाय का घी डालने से निंद भी अच्छी आती है.

धुप मे जानेके बाद घुट-घुट पाणी पिये एकदम से कदापिह नही, धुप मे से छाया मे आने के बाद तुरंत पाणी न पिये। वात ..आकाश और वायु से मिलकर बना है, इसलिये यह गतिशील, हल्का, पतला, शुष्क, रुक्ष,व सर्वव्यापी होता है।

वात-प्रधान वाले व्यक्ती हर काम मे जल्दबाजी करना चंचल फटाफट फैसले लेना चिडचिडाहट चिंता के शिकार हो जाते है। वात-प्रधान वाले व्यक्ती उपवास न करना, आलस्य न करना, अधिक मेहनत न करना, अधिक ठंडी, अधिक रतजगेपन, अधिक सहवास न करना आदी से बचकर रही है। आप संतुलित जिवन जी सकते है.
how-do-tridefect-work-air-vatham,tridosh-kaise-kaam-karate-hai,vaat,desi-health-tips,ayurveda,healthcare,tridhosh,

धन्यवाद दोस्तो आपका किमती समय आयुर्वेद को देने के लिये। जल्द ही मिलेगे......

8/24/2018

Law's of Ayurveda Medicine-aayurved chikitsa ke niyam

आज आयुर्वेद के नियम देखेगे आयुर्वेदिक नुस्खो से आप घर मे हि सहजता से औषधी दवाईया बनाई जा सकती है.

Health-care-tips-Laws-of-Ayurveda-Medicine-aayurved-chikitsa-ke-niyam-desi-health-tips-ayurved-healthcare
नमस्कार दोस्तो 
आपके समज (उलझन) मे नही आ रहा तो किसी जानकार अथवा वैध से परामर्श कर लेना उचित होंगा  फिर आप उस प्रकार कि उलझन वाली स्थिती से बच सकते है.

Health-care-tips,Laws-of-Ayurveda,Medicine,aayurved-chikitsa-ke-niyam,desi-health-tips-ayurved-healthcare
                            Health-care-tips
1) औषधी सेवन के साथ प्रयुक्त आहार का पालन करना चाहिये पथ्य का ध्यान दिया तो रोगी को बहुत ही जल्दी ठिक कर सकतेे है.

2) सबसे पहले कोई भी नुस्खा कुछ दिन सेवन करके देखो यदि रोगी को लाभ औषधी का असर हो रहा है तो आगे चलाइये या कुछ दिन रूककर पद्धतिमे बदलाव करे.

3) आयुर्वेद नुस्खो से लाभ दायक (सकारात्मक) संकेत मिलने लगे तो उसे पुर्ण स्वास्थ्य लाभ होने तक इस्तेमाल करते रहै रोगी को पुर्ण आराम मिल जाने के बाद औषधी एकदम से कदापीही बंद ना करे उसकी मात्रा कम-कम  (धिरे-धिरे) करते हुए एक दो हप्ते बाद बंद कर सकते हो.

4) खासतौर से ध्यान रखिये रोगी को कौनसी बिमारी का असर है,इसका अच्छेसे अध्ययन करके वही चिकित्सा, नुस्खा आरंभ करे रोग किस प्रकृती का है इन बातो को भी ध्यान मे रखनी चाहीये एक साथ कई-कई नुस्खो को न अजमाएँ,बिना पर्याप्त जानकारी के कोई भी अनुचित कदम न उठाये.

5) सबसे महत्त्व पुर्ण बात तो यह है बाजार में मिलने वाली विभिन्न जडी-बुटि और औषधी कि शुद्धीकरण अच्छे तरह से मालुमात जाँच-परख कर लेनी चाहिये ध्यान रखे अशुद्ध मिलावटी जड़ी बुटिया फायदे कि बजाय नुकसान देह साबित हो सकती है ..

Health-care-tips,Laws-of-Ayurveda,Medicine,aayurved-chikitsa-ke-niyam,desi-health-tips,ayurved,healthcare,

आगे हम आयुर्वेद और हमारे दिनचर्या के  बारे में बात करेंगे .

धन्यवाद दोस्तों। .. 


How to take care your health and tips - swasth ki dekhabhaal ke liye ye upaay kare

आयुर्वेद और आपकी दिनचर्या ..

How-to-take-care-your-health-and-Health-tips-swasth-ki-dekhabhaal-ke-liye-ye-upaay-kare-desi-health-tips-ayurveda-healthcare-lifestyle
नमस्कार दोस्तों...जानते है आयुर्वेद और उससे जुडी आपकी दिनचर्या इसके बारे में रोचक तथ्य ...
आयुर्वेद के नियमो का  नियमित  से  पालन करे प्रतिदिन लगभग 6 से 7 घंटे कि नींद लेना जरुरी और  उचीत मानागया है. नींद नहीं आ रही है तोह योगनिद्रा के आसन करे वैसे तोह कम निंद से भी काम चल सकता है, लेकिन युवाओ को पर्याप्त नींद की आवश्यकता होती है.

How-to-take-care,your,health-and-Health,tips,swasth-ki-dekhabhaal-ke-liye-ye-upaay-kare,desi-health-tips-ayurveda-healthcare-lifestyle
                                      How-to-take-care

1) निंद के मामले मे सभी के लिए एक सा नियम नही लगाया जा सकता निंद से अपने आपको तरोताजा महसुस करे उतनी नींद पर्याप्त होती है.
लेकिन दोस्तों हमेशा याद रखे जितनी अच्छी हमारी नीन्द , उतनाही अच्छा हमारा लैगिक-स्वास्थ, होता है.

2) आप सभी को तोह पता हि होगा ये जो जिंदगी है बहुत भागदौड भरी जिंदगी है,लेकिन हम फिर भी जितना हो सके नियमो का नियमित से पालन करने की कोशिश करे जैसे रात मै 10 बजे सो जाना - सबेरे 4 से 5 बजे निंदसे जग जाना ये पालन नियमित करते हो तो स्वास्थ के लिए बहुत अच्छा है.

3) बहुत से लोग है जीने शारीरिक श्रम बहूतही कम लगभग नही के बराबर करने पड़ते  है उन्हे हर सुबहा जल्दी उठकर  योगासन व्यायाम जरूर करना चाहियें जैसे - सुर्य नमस्कार, सर्वागासन, सुप्त वज्रासन, मत्स्यासन, पश्चिमोत्तान, भुजंगासन, धनुरासन, शलभासन, मयुरासन, कपालभाती, शवासन, भस्त्रिका, ये आसन प्राणायाम नित्य नियमित करने से शरीर मे दिन  भर के लिए चुस्ती फुरती बनी रहती है. मै बहुत जल्दी योगासन के पुरे व्हिडिओ अपलोड करने वाला हु।  आसन विशेषज्ञ से ही सीखने चाहीये। 

4) सुबह हल्का नाश्ता करना शरीर के लिये फायदे मंद होता है नाश्ता हलका होना चाहीये जैसे अंकुरित अनाज, मौसमी फल दुध लेना उचित होता है।  कभी कबार नाश्ता न लिया जाए तो भी बेहतर है नाश्ता लेने के बाद भोजन 4 घंटे बाद करना चाहियें और रात का भोजन 8 बजे तक करना आपके लिये उचित है,
और एक महत्व पुर्ण बात बार-बार खानेकी आदत छोड दो.
मतलब 15 मिनटं बाद 30 मिनट  बाद 1 घंटे बाद ये बिलकुल उचित नही माना जाता हे आयुर्वेद में नियमो  के अनुसार कमसे कम 4 घंटे का गैप रखना  है.
इसके बिच आप फल या हल्का पे ले सकते है.भोजन के बाद प्रतीदिन एक चम्मच आँवला चुर्ण, लेने से पाचन शक्ती, और रोग प्रतिकार शक्ति, बढती है.

5) तांबे के बर्तन मे सव्वा लिटर पाणी रात भर रख लो सबेरे बिना दाँत साफ किए पाणी पिकर शौच जाना चाहिये. 
चाय-काँफी अच्छे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है उससे औषधीय गुण कम हो जाते है नष्ट हो जाते है,
चाय पिनी ही है तो दोस्तों ग्रीन टि पिये क्योकी स्वास्थ्य के लिये फायदे मंद साबित होती  है.

6) मानसिक तनाव और शारीरिक तनाव, ये दोनो तनाव स्वास्थ्य के सबसे बडे दुश्मन है दोस्तों ये दोनो तनाव आपके साथ है तो आप युवावस्था, मे ही बुढापे जैसे दिखने लगते है.
सचमुच चिंता चिता से काम नहीं  होती, मित्रो तनाव को आपके आस पास भी मत भटकने देना तमाम समस्याओ का आप समाधान नही ढुढसकते तो आप चिंतन करके उसका समाधान ढुढसकते हो.
पहले तो आप शांत होकर रोज सबेरे प्रतिदिन प्रणायाम, ध्यान, योगासन, नियमित आसन करे ये आसनो से आपको बहुत फायदा होगा. दोस्तों शारीरिक तनाव बहुतेक प्रकार हो सकते है जैसे कोई बिमार हो तो पहले आप अपनी बिमारी का सही ढंगसे  इलाज करके आप पौष्टिक आहार, लेकर आप अपनी शारिरीक दुर्बलता,  तनाव दुर कर सकते है. 
आपको किसी जानकार या वैद्य, से सला मशवरा करना चाहिए।

How-to-take-care-your-health-and-Health-tips-swasth-ki-dekhabhaal-ke-liye-ye-upaay-kare-desi-health-tips-ayurveda-healthcare-lifestyle

आगे  हम आपको विभिन्न रोगो के बारे में जानकारी और उसके आयुर्वेद में सफल हुए इलाज, साथमे अच्छी अच्छी हेल्थ से जुडी बाते  और टिप्स ले कर आएंगे ..

धन्यवाद  दोस्तों ...