8/31/2018

How bile (gall) is work-kaise pitt kaam karata hai

आज बात करते है, पित्त के बारेमे जानते है

 
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नमस्कार मित्रो
पित्त अग्नी से बना है तो इसका असर भी अग्नी जैसा है।भुख, प्यास, शरीर कि गरमी, बुद्धिमत्ता, कामावेग, इत्यादी के लिये शरीर के लिये उत्तरदायी होता है। अग्नी का गुण गरमी जलन शरीर में कही भी गरमी और जलन महसुस हो तो समजलेना की पित्त बढा है। हथेली, आँखो, पेशाब, इत्यादी मे जलन हो रही है तो समज लेना पित्त की सुरवात हो रही है.


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एसिडिटी अल्सर भी बढे पित्त का परिणाम है। पित्त-असंतुलन लिवर में पहुचे तो पिलीया होता है। गुरदे, गर्भाशय, में पहुचे तो ये अंग बेकार हो जाते है। खुन तक पहुचता है तो चर्मरोग, खुजली होती है, सावध हो जाना.
पेशाब, पसीने मे या शरीर मे कही पीलापन है और शरीर पर लाली है तो पित्त असंतुलन है समज लेना।
पसीना, सास, डकार, अपानवायु, बदबु जादा बढे तो पित्त का उद्रेक है। शोक, भय, क्रोध, ईर्ष्या जैसी भावना ओं को काबु मे रखना चाहियें। कैंसर जैसे रोग पित्त बढने के कारण ही होते है। जैसे वात का संबंध मन से है, वैसेही पित्त का संबंध बुध्दी से है। यदी पित्त ज्यादा असंतुलन में आ जाये तो आदमी पागल भी हो सकता है.
पित्त को संतुलित रखने के लिये तैराकि जैसे व्यायाम करने चाहीये, पहाडों कि सैर, झील के किनारे चहल करना, चने का भुट्टा आदी पित्त शांत करने में कारगर है.

और पित्त प्रकृतीवाले को मिठा, कटु, कसैले,ठंडे पदार्थ अनुकुल है, चंदन, चिकनी मिट्टी आदी ठंडी चीजो का अनुलेप, शीतल जल से स्नान, तेल मालिश आदी पीत्तवाले लोगो के लिये विशेष लाभदाई है। पित्त प्रकृतीवाले लोग गरमी के प्रती असहिष्णु होते है। इन बातो को ध्यान मे रखते हुये पित्त प्रकृती के लोग अपना अच्छा स्वास्थ्य हासिल कर सकते है.

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धन्यवाद दोस्तो 

8/28/2018

How do tridefect work air vatha-tridosh kaise kaam karate hai vaat

त्रिदोष कैसे काम करते है वात 

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नमस्कार मित्रो
अब बात करते है आहार कैसे अपनाये त्रिदोष पंचभुतों का रुप है, वात आकाश और वायु से बना है, इसका प्रभाव वायु और आकाश हैपित्त अग्नि से बना है, इसका प्रभाव अग्नी जैसे हैकप की उत्पत्ती जल और पृथ्वी से हुई है, इसका प्रभाव जल और पृथ्वी के गुण से प्रभाव है। ये पाँचो तत्व ऊर्जा के विविध रुप है.
संसार के हर व्यक्ती की मुल प्रकृती का इन्ही त्रिदोषों द्वारा निर्धारित है। यदि अपनी प्रकृती की पहचान करते है तो आहार-विहार कि कुछ सावधानियाँ की जाये तो आसानी से स्वास्थ्य जीवन जिया जा सकता है.


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शरिर की अधिक तर बीमारीयाँ असंतुलीत वात के कारण से पैदा होती है, जिस तरहा वायु से पृथ्वी पर जीवन संभव होता है, इस तर हा से वात दोष के बगैर पित्त और कफ दोष नही हो सकते.

वायु से गती वात का भी एक लक्षण है गती, शरीर कि सभी गतियों का संचालक वात होता है। शरीर के किसी भाग मे गती मे रुकावट बन जाती है तो, उस वक्त समजलेना चाहिये की वात असंतुलित हो रहा है। यदी ह्रदय की धडकन में गडबडी ह्रदय को ज्यादा ताकद लगानी पडती है तो, इसका मतलब ये है कि वात बढ रहा है. चाहकर भी कोई व्यक्ती चीडचीड अशांत है। तो इसका मतलब वात असंतुलित है. वात का दुषप्रभाव लकवा, पार्किंसन, अकडन, बढे हुये वात के परिणाम है.

हमारा शरीर हमारे मन से गतिमान है, इसलिये वात का संबंध भी मन से है, मानसिक व्याधियों मे वात का कुछ न कुछ प्रभाव पडता है। ऐसा व्यक्ती मन की शक्ती कल्पनाशीलता के इस्तेमाल से किए जाने वाले अनेक कामो मे अपनी प्रतिभा प्रमाणीत कर सकते है. 

वात का और एक लक्षण सुखापन
बडी आँत वात के मुख्य स्थान है। मलाशय यहा बढे हुए वात का प्रभाव मल के सुख जाने, कडक हो जाने बाद या कब्ज के रुप मे दिखता है। दुबले, पतले, लोग साक्षात वात के रोगी होते है। त्वचा, होठ, एडिया फटना वात किही लक्षण है.

वायु और आकाश दोनो की प्रकृती ठंडी है, जब ठंड बढती है तो वात-प्रधान व्यक्ती का वात प्रकोप भी बढने लगता है, आधुनिक जगत मे फ्रिज का इस्तेमाल बहुत जादा बड गया है, फ्रीज मे रखी चीजें सलामत तो रहती है, पर उनका प्रभाव वातकारी होता है.

खाली जगह मिलनेपर वायु की घुसपैठ करती है, इसी तरहा अपने शरिर में खाली स्थान पाते ही वात की घुसपैठ सुरु हो जाती है, सोने से पुर्व नाक में गाय का घी डालने से वात संतुलन के लिये बहुत महत्वपूर्ण बात है। और नाक में गाय का घी डालने से निंद भी अच्छी आती है.

धुप मे जानेके बाद घुट-घुट पाणी पिये एकदम से कदापिह नही, धुप मे से छाया मे आने के बाद तुरंत पाणी न पिये। वात ..आकाश और वायु से मिलकर बना है, इसलिये यह गतिशील, हल्का, पतला, शुष्क, रुक्ष,व सर्वव्यापी होता है।

वात-प्रधान वाले व्यक्ती हर काम मे जल्दबाजी करना चंचल फटाफट फैसले लेना चिडचिडाहट चिंता के शिकार हो जाते है। वात-प्रधान वाले व्यक्ती उपवास न करना, आलस्य न करना, अधिक मेहनत न करना, अधिक ठंडी, अधिक रतजगेपन, अधिक सहवास न करना आदी से बचकर रही है। आप संतुलित जिवन जी सकते है.
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धन्यवाद दोस्तो आपका किमती समय आयुर्वेद को देने के लिये। जल्द ही मिलेगे......

8/24/2018

Law's of Ayurveda Medicine-aayurved chikitsa ke niyam

आज आयुर्वेद के नियम देखेगे आयुर्वेदिक नुस्खो से आप घर मे हि सहजता से औषधी दवाईया बनाई जा सकती है.

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नमस्कार दोस्तो 
आपके समज (उलझन) मे नही आ रहा तो किसी जानकार अथवा वैध से परामर्श कर लेना उचित होंगा  फिर आप उस प्रकार कि उलझन वाली स्थिती से बच सकते है.

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1) औषधी सेवन के साथ प्रयुक्त आहार का पालन करना चाहिये पथ्य का ध्यान दिया तो रोगी को बहुत ही जल्दी ठिक कर सकतेे है.

2) सबसे पहले कोई भी नुस्खा कुछ दिन सेवन करके देखो यदि रोगी को लाभ औषधी का असर हो रहा है तो आगे चलाइये या कुछ दिन रूककर पद्धतिमे बदलाव करे.

3) आयुर्वेद नुस्खो से लाभ दायक (सकारात्मक) संकेत मिलने लगे तो उसे पुर्ण स्वास्थ्य लाभ होने तक इस्तेमाल करते रहै रोगी को पुर्ण आराम मिल जाने के बाद औषधी एकदम से कदापीही बंद ना करे उसकी मात्रा कम-कम  (धिरे-धिरे) करते हुए एक दो हप्ते बाद बंद कर सकते हो.

4) खासतौर से ध्यान रखिये रोगी को कौनसी बिमारी का असर है,इसका अच्छेसे अध्ययन करके वही चिकित्सा, नुस्खा आरंभ करे रोग किस प्रकृती का है इन बातो को भी ध्यान मे रखनी चाहीये एक साथ कई-कई नुस्खो को न अजमाएँ,बिना पर्याप्त जानकारी के कोई भी अनुचित कदम न उठाये.

5) सबसे महत्त्व पुर्ण बात तो यह है बाजार में मिलने वाली विभिन्न जडी-बुटि और औषधी कि शुद्धीकरण अच्छे तरह से मालुमात जाँच-परख कर लेनी चाहिये ध्यान रखे अशुद्ध मिलावटी जड़ी बुटिया फायदे कि बजाय नुकसान देह साबित हो सकती है ..

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आगे हम आयुर्वेद और हमारे दिनचर्या के  बारे में बात करेंगे .

धन्यवाद दोस्तों। .. 


How to take care your health and tips - swasth ki dekhabhaal ke liye ye upaay kare

आयुर्वेद और आपकी दिनचर्या ..

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नमस्कार दोस्तों...जानते है आयुर्वेद और उससे जुडी आपकी दिनचर्या इसके बारे में रोचक तथ्य ...
आयुर्वेद के नियमो का  नियमित  से  पालन करे प्रतिदिन लगभग 6 से 7 घंटे कि नींद लेना जरुरी और  उचीत मानागया है. नींद नहीं आ रही है तोह योगनिद्रा के आसन करे वैसे तोह कम निंद से भी काम चल सकता है, लेकिन युवाओ को पर्याप्त नींद की आवश्यकता होती है.

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1) निंद के मामले मे सभी के लिए एक सा नियम नही लगाया जा सकता निंद से अपने आपको तरोताजा महसुस करे उतनी नींद पर्याप्त होती है.
लेकिन दोस्तों हमेशा याद रखे जितनी अच्छी हमारी नीन्द , उतनाही अच्छा हमारा लैगिक-स्वास्थ, होता है.

2) आप सभी को तोह पता हि होगा ये जो जिंदगी है बहुत भागदौड भरी जिंदगी है,लेकिन हम फिर भी जितना हो सके नियमो का नियमित से पालन करने की कोशिश करे जैसे रात मै 10 बजे सो जाना - सबेरे 4 से 5 बजे निंदसे जग जाना ये पालन नियमित करते हो तो स्वास्थ के लिए बहुत अच्छा है.

3) बहुत से लोग है जीने शारीरिक श्रम बहूतही कम लगभग नही के बराबर करने पड़ते  है उन्हे हर सुबहा जल्दी उठकर  योगासन व्यायाम जरूर करना चाहियें जैसे - सुर्य नमस्कार, सर्वागासन, सुप्त वज्रासन, मत्स्यासन, पश्चिमोत्तान, भुजंगासन, धनुरासन, शलभासन, मयुरासन, कपालभाती, शवासन, भस्त्रिका, ये आसन प्राणायाम नित्य नियमित करने से शरीर मे दिन  भर के लिए चुस्ती फुरती बनी रहती है. मै बहुत जल्दी योगासन के पुरे व्हिडिओ अपलोड करने वाला हु।  आसन विशेषज्ञ से ही सीखने चाहीये। 

4) सुबह हल्का नाश्ता करना शरीर के लिये फायदे मंद होता है नाश्ता हलका होना चाहीये जैसे अंकुरित अनाज, मौसमी फल दुध लेना उचित होता है।  कभी कबार नाश्ता न लिया जाए तो भी बेहतर है नाश्ता लेने के बाद भोजन 4 घंटे बाद करना चाहियें और रात का भोजन 8 बजे तक करना आपके लिये उचित है,
और एक महत्व पुर्ण बात बार-बार खानेकी आदत छोड दो.
मतलब 15 मिनटं बाद 30 मिनट  बाद 1 घंटे बाद ये बिलकुल उचित नही माना जाता हे आयुर्वेद में नियमो  के अनुसार कमसे कम 4 घंटे का गैप रखना  है.
इसके बिच आप फल या हल्का पे ले सकते है.भोजन के बाद प्रतीदिन एक चम्मच आँवला चुर्ण, लेने से पाचन शक्ती, और रोग प्रतिकार शक्ति, बढती है.

5) तांबे के बर्तन मे सव्वा लिटर पाणी रात भर रख लो सबेरे बिना दाँत साफ किए पाणी पिकर शौच जाना चाहिये. 
चाय-काँफी अच्छे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है उससे औषधीय गुण कम हो जाते है नष्ट हो जाते है,
चाय पिनी ही है तो दोस्तों ग्रीन टि पिये क्योकी स्वास्थ्य के लिये फायदे मंद साबित होती  है.

6) मानसिक तनाव और शारीरिक तनाव, ये दोनो तनाव स्वास्थ्य के सबसे बडे दुश्मन है दोस्तों ये दोनो तनाव आपके साथ है तो आप युवावस्था, मे ही बुढापे जैसे दिखने लगते है.
सचमुच चिंता चिता से काम नहीं  होती, मित्रो तनाव को आपके आस पास भी मत भटकने देना तमाम समस्याओ का आप समाधान नही ढुढसकते तो आप चिंतन करके उसका समाधान ढुढसकते हो.
पहले तो आप शांत होकर रोज सबेरे प्रतिदिन प्रणायाम, ध्यान, योगासन, नियमित आसन करे ये आसनो से आपको बहुत फायदा होगा. दोस्तों शारीरिक तनाव बहुतेक प्रकार हो सकते है जैसे कोई बिमार हो तो पहले आप अपनी बिमारी का सही ढंगसे  इलाज करके आप पौष्टिक आहार, लेकर आप अपनी शारिरीक दुर्बलता,  तनाव दुर कर सकते है. 
आपको किसी जानकार या वैद्य, से सला मशवरा करना चाहिए।

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आगे  हम आपको विभिन्न रोगो के बारे में जानकारी और उसके आयुर्वेद में सफल हुए इलाज, साथमे अच्छी अच्छी हेल्थ से जुडी बाते  और टिप्स ले कर आएंगे ..

धन्यवाद  दोस्तों ... 

Importance of The Ayurveda-aayurved ka mahattva

आयुर्वेद का महत्व 

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नमस्कार दोस्तों आयुर्वेद, सही मायने मे भारत का अपना चिकित्सा, विज्ञान है. 
चिकित्सक, विज्ञानं में  इसका महत्व हमेशा से विलक्षण रहा है, मजे की बात तो यह है, दोस्तों आधुनिक चिकित्सा विज्ञान अभीतक जिन बिमारीयो को ठिक नही कर पाया उन बिमारीयो के इलाज प्राचीन आयुर्वेदिक, विधियो मे तलाश रहा है.

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ऐसे कितनेही रक्त, के और हड्डी, के रोग है , जिनके बारे में आधुनिक चिकित्सा विज्ञानं में कोई जानकारी नहीं उसका भी सफल इलाज आयुर्वेद चिकित्सा में पाया जाता है. हमारी रोज मर्रा की खाद्य संस्कृति, आयुर्वेद पर बहुत अछेसे निर्भर करती है, जैसे हमारे मसाले सब्जियां, इसका बहुत अच्छा उदाहरण है.

आयुर्वेद चिकित्सा पध्दतीयाँ अपने हि सामर्थ्य से अपनी जगह बनाने मे सफल हो रही है क्यो कि यही हमारे वातावरण व हमारी शारीर के लिये अनुकूल है घर पर ही आप जडी-बुटीयो, की  दवाईया  औषधी बना सकते है ये सभी नुस्खे, कारगर और सिद्ध, है विभिन्न प्रबुद्ध लोगो द्वारा आजमाए जा चुके है.

आयुर्वेद मे इन नुस्खो का आहार, के साथ प्रयोग करके आप अस्पतालो और डॉक्टर से आप निजात पा सकते है,  अस्पतालो मै रूपये गँवा देने के बाद भी आप की बिमारी ठिक नही हो रही तो चंद सिक्के की लागत वाले इन नुस्खो से ठीक की जा सकती है.

प्राचीन ग्रंथ, मे वर्णित कीजाने वाली अभीतक बहुत सी आयुर्वेद की उपचार पढती जड़ी बुटिया और उनका ज्ञान लुप्त हो चूका है. भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सा, पध्दती कि वह धारा यदि सतत चलती रही होती तो आज स्वास्थ संबंधित जटिल से जटिल समस्या भी आसानी से हल हो जाती.
लेकिन दोस्तों हमारे आयुर्वेद के ऊपर किये गए रिसर्च विधिया हम इस माध्यम के जरिये आपसे जरूर शेयर करेंगे.

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धन्यवाद्  दोस्तों  जल्दही मिलते है ..