8/28/2018

How do tridefect work air vatha-tridosh kaise kaam karate hai vaat

त्रिदोष कैसे काम करते है वात 

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नमस्कार मित्रो
अब बात करते है आहार कैसे अपनाये त्रिदोष पंचभुतों का रुप है, वात आकाश और वायु से बना है, इसका प्रभाव वायु और आकाश हैपित्त अग्नि से बना है, इसका प्रभाव अग्नी जैसे हैकप की उत्पत्ती जल और पृथ्वी से हुई है, इसका प्रभाव जल और पृथ्वी के गुण से प्रभाव है। ये पाँचो तत्व ऊर्जा के विविध रुप है.
संसार के हर व्यक्ती की मुल प्रकृती का इन्ही त्रिदोषों द्वारा निर्धारित है। यदि अपनी प्रकृती की पहचान करते है तो आहार-विहार कि कुछ सावधानियाँ की जाये तो आसानी से स्वास्थ्य जीवन जिया जा सकता है.


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शरिर की अधिक तर बीमारीयाँ असंतुलीत वात के कारण से पैदा होती है, जिस तरहा वायु से पृथ्वी पर जीवन संभव होता है, इस तर हा से वात दोष के बगैर पित्त और कफ दोष नही हो सकते.

वायु से गती वात का भी एक लक्षण है गती, शरीर कि सभी गतियों का संचालक वात होता है। शरीर के किसी भाग मे गती मे रुकावट बन जाती है तो, उस वक्त समजलेना चाहिये की वात असंतुलित हो रहा है। यदी ह्रदय की धडकन में गडबडी ह्रदय को ज्यादा ताकद लगानी पडती है तो, इसका मतलब ये है कि वात बढ रहा है. चाहकर भी कोई व्यक्ती चीडचीड अशांत है। तो इसका मतलब वात असंतुलित है. वात का दुषप्रभाव लकवा, पार्किंसन, अकडन, बढे हुये वात के परिणाम है.

हमारा शरीर हमारे मन से गतिमान है, इसलिये वात का संबंध भी मन से है, मानसिक व्याधियों मे वात का कुछ न कुछ प्रभाव पडता है। ऐसा व्यक्ती मन की शक्ती कल्पनाशीलता के इस्तेमाल से किए जाने वाले अनेक कामो मे अपनी प्रतिभा प्रमाणीत कर सकते है. 

वात का और एक लक्षण सुखापन
बडी आँत वात के मुख्य स्थान है। मलाशय यहा बढे हुए वात का प्रभाव मल के सुख जाने, कडक हो जाने बाद या कब्ज के रुप मे दिखता है। दुबले, पतले, लोग साक्षात वात के रोगी होते है। त्वचा, होठ, एडिया फटना वात किही लक्षण है.

वायु और आकाश दोनो की प्रकृती ठंडी है, जब ठंड बढती है तो वात-प्रधान व्यक्ती का वात प्रकोप भी बढने लगता है, आधुनिक जगत मे फ्रिज का इस्तेमाल बहुत जादा बड गया है, फ्रीज मे रखी चीजें सलामत तो रहती है, पर उनका प्रभाव वातकारी होता है.

खाली जगह मिलनेपर वायु की घुसपैठ करती है, इसी तरहा अपने शरिर में खाली स्थान पाते ही वात की घुसपैठ सुरु हो जाती है, सोने से पुर्व नाक में गाय का घी डालने से वात संतुलन के लिये बहुत महत्वपूर्ण बात है। और नाक में गाय का घी डालने से निंद भी अच्छी आती है.

धुप मे जानेके बाद घुट-घुट पाणी पिये एकदम से कदापिह नही, धुप मे से छाया मे आने के बाद तुरंत पाणी न पिये। वात ..आकाश और वायु से मिलकर बना है, इसलिये यह गतिशील, हल्का, पतला, शुष्क, रुक्ष,व सर्वव्यापी होता है।

वात-प्रधान वाले व्यक्ती हर काम मे जल्दबाजी करना चंचल फटाफट फैसले लेना चिडचिडाहट चिंता के शिकार हो जाते है। वात-प्रधान वाले व्यक्ती उपवास न करना, आलस्य न करना, अधिक मेहनत न करना, अधिक ठंडी, अधिक रतजगेपन, अधिक सहवास न करना आदी से बचकर रही है। आप संतुलित जिवन जी सकते है.
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धन्यवाद दोस्तो आपका किमती समय आयुर्वेद को देने के लिये। जल्द ही मिलेगे......

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धन्यवाद दोस्तो आपके सुझाव के लिये....धन्यवाद