9/29/2018

Take these measures to relieve constipation from your body


अपने शरीर से कब्ज से छुटकारा पाने के लिये इन उपायो को ले

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नमस्कार दोस्तों 
कब्जियत में ईसबगोल का सेवन भी लाभदायक होता है। रात को सोते समय एक पाव लिटर दुध में 6-7 पेंडखजुर उबालकर पिये तो कब्ज में लाभ होता है, सर्दी-जुकाम के लिये भी यह फायदेमंद है। इसके अलावा चाहें तो दुध में दस-बारह मनुक्के उबालकर खाये और ऊपर से वही दुध पिया जाये तो सबेरे पेट अच्छा साफ होगा ही होगा और पुरानी से पुरानी कब्ज दुर करने में भी यह कारगर है.

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Take these measures to relieve constipation from your body

एक महत्त्वपुर्ण बात हरड, का सेवन करने से पहले। जब शरीर अत्यंत-थका-हुआ, या अत्यंत-दुर्बल, भुखा, प्यासा, अम्लपित्त-बढा-हुआ, या पित्त-कुपित्त, अवस्था में हो, तब हरड का सेवन नही करना चाहियें.
जुलाब लेने की आदत बहुत नुकसान देह साबित हो सकती है। बहुत जरुरी होने पर हल्ले जुलाब के तौर पर आप एरंडेल तेल के चार ते पाच चम्मच ज्यादा कठीण कब्ज हो तो सात आठ चम्मच याने सौ मि.ली. गरम पाणी या दुध में मिलाकर रात में सोते समय पिने से शौच साफ आता है.

कुछ उपचारों को सुविधानुसार अपनाते हुये सबेरे 4-5 कि.मी. पैदल चलने की आदत डालें। शरीर को चुस्त-स्फूर्ती रखने के लिये यह सर्वश्रेष्ठ उपायों में से है। योगासन शुरू में तकलीफदेह लग सकता है, पर कुछ समय बाद ठिक तरीके से अभ्यास हो जाने पर आनंददायक होता है।महत्त्वपुर्ण बात अलबत्ता, योगासन किसी योग जानकार से  सलाह लेकर ही करना चाहियें.

इनमें से एक-एक उपायों को अपनाने के कुछ दिनो के बाद आप को महसुस होगा कि हर समय परेशान करनेवाली कब्जियत आपसे बहुत दुर भाग जायेगी। कब्ज ही अधिकतर रोगों की जड है। यदी पेट में कब्ज की स्थिती न बनने पाये तो तमाम दुसरे रोगों सें बचा जा सकता है.

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धन्यवाद दोस्तो

9/25/2018

Take away these constipation from your body

अपने शरीर से इन कब्ज को दूर करो

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नमस्कार दोस्तो
कब्ज मे सुधार चाहते हो तो भोजन मे महत्त्वपुर्ण सुधार करना। भाजी, सलाद, हरी-शाक, और रेशेदार, पदार्थ का भोजन मे इस्तेमाल बढाना चाहियें। छिलकायुक्त-दाल, चोकर-युक्त-आटे-की-रोटियाँ, अंकुरित-अनाज, अपने शरीर मे इन पदार्थो से पौष्टिकता तो मिलती है, और आँतो की सक्रियता भी बढती है। साथ हि साथ पाणी का भी भरपुर इस्तेमाल करना चाहिये 7-8 ग्लास पाणी पिया जाये तो अच्छा है। हप्ते मे एक दो दिन का उपवास करे और एनिमा के इस्तेमाल से कब्ज ही क्या, अन्य प्रकार रोगो से आप बचे रह सकते है। सबेरे शौचालय जाने से पहले एक बडा गिलास पाणी जरूर पियें। इससे आँतो का काम आसान हो जायेगा.


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कब्ज के रोगीयो को अमरूद-के-मौसम, मे सबेरे पाव भर अमरूद खाना चाहिये, अच्छा लाभ मिलेगा। गरमी के मौसम पके बेल-का-शरबत, सबेरे या दोपहर भोजन के तिन-चार घंटे बाद पिये। अन्य मौसम दिनों मे भोजन के बाद पका-पपीता, खाईये कब्ज सहित पेट के अन्य तरहा के रोगों में अतिशय लाभ मिल सकता है। इसके अलावा नीबुं, आँवला, भुने-चने, छाछ, आदि चीजों का सेवन से पेट कि विभिन्न प्रकार के बीमारीयाँ से बचा जा सकता है.

हरड, का सेवन कब्ज भगाने का अच्छा उपाय है। हरड एक माँ के समान शरीर की देखभाल करती है। हरड के सेवन के फायदे ही फायदे है, नुकसान कुछ भी नही। रोज रात मे सोते समय छोटी काली-हरड, का चूर्ण खाईये और कब्ज को अपने शरीर से दुर भगाईये। चाहें तो जब मन मे आये तो दो-चार तुकडे मुहँ मे डालकर चुसते रहिये। नियमित सेवन से आपकी यौवन-शक्ती, ज्यादा दिनों तक बरकरार  रहेगी और रोग-प्रतिरोधक-शक्ती, बढेगी.

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धन्यवाद दोस्तो

9/22/2018

Important information about constipation

कब्ज के बारे मे महत्त्वपुर्ण सुचना

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नमस्कार दोस्तो मौजुदा हालात में अगर रोगियों का वर्गीकरण किया जाये तो सबसे ज्यादा जिस रोग के लोग मिलेंगे, वह है कोष्ठबध्दता, यानी कब्जियत। आजकल के अप्राकृतिक आहार-विहार का अनिवार्य नतीजा है। मैदायुक्त पदार्थ जैसे कचौरी, समोसे, पुरी, पाव, बिस्कीट, तली-भुनी चीजें और तमाम तरहा के व्यंजन और श्रम हिन अनियमितता दिनचर्या, ये सब कोष्ठबध्दता के प्रधान कारण है। भोजन में रेषाविहीन चीजों को ज्यादा स्थान देने से और शरीर को पर्याप्त श्रम न करने के कारण आँतो कि सक्रियता कम होती है।


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Important information about constipation

शरीर को पर्याप्त गतिशील न रखा जाये तो जठर में पाचक रसों का भी पर्याप्त स्राव नही हो पाता। नतिजन, आहार की पाचन क्रिया मंद हो जाती है। और मल निष्कासन का काम बाधित होकर कोष्ठबध्दता की शुरुवात हो जाती है। कोष्ठबध्दता के नाते ही आँतो में मल सडकर विष बनता है और सारे रक्त को दुषित करता है। इस तरहा से और तमाम रोग उत्पन्न होते रहते है। इसी लिये आयुर्वेद मे कुपित मल को अधिकतर रोगों की जड कहा गया है.



इसके अलावा कब्ज का एक कारण ज्यादा मानसिक तान भी है। यदी हम मानसिक तनाव की स्थिती से गुजर रहे हों तो इसका असर पाचन संस्थान पर निश्चित रूप से पडता है। जठर में पाचक रसो का स्राव कम होने लगता है और पाचन क्रिया मंद हो जाती है। कुछ ऐसे उपाय है, जिनको आप अपने कोष्ठबध्दता की स्थिती से बचा जा सकता है। इस संबंध में पहली बात तो यह है कि हमें आहार को अच्छी तरहा से चबाकर खाना चाहिये। मतलब ठोस चीजों  को इतना चबाइये कि निवाला पिने लायक बन जाये। दाँतो का काम आँतो से नही लिया जाये तो अच्छा है।

यदी दाँतो का काम आँतो पर डाला जायेगा तो निश्चित हि रुप से आँतो कमजोर होगी और कोष्ठबध्दता जैसी बिमारिया पैदा होगी.

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धन्यवाद दोस्तो

9/19/2018

What is the right way of food

भोजन का सही तरीका क्या है

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नमस्कार दोस्तो
खुर्ची कार्यालय आदी में काम करने वाले लोगों के लिये हाथ धोने से बचने के लिये कई बार छुरी या चम्मच से खाना सुविधा जनक होता है, परंतु सच्चाई यही है कि हाथ से खाना ही सही मायने मे फायदे मंद होता है। हाथ से निवाला बनाते समय भोजन के तापमान की सुचना अपने शरीर को पहले ही मिल जाती है। और आँते भोजन को पचाने के लिये तैयार हो जाती है.
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इससे भोजन आसानी से पचता है। हाथ की त्वचा को भोजन के तापमान का अंदाज हो जाने से निवाला मुँह मे डालते समय मुँह जलने का जिभ जलने का खतरा नही रहता। छुरी चम्मच से खाने पर भोजन के तापमान का ठिक से अंदाज नही हो पाता.

इसके अलावा आयुर्वेद के अनुसार शरीर पाच तत्त्वों से मिलकर बना है धरती, आकाश, जल, वायु, और अग्नी। यदि इन पाचों तत्त्वों का शरीर में असंतुलन हो तो कई तरहा के रोग होने लगते है। हाथ की उँगलियों के सहारे निवाला बनाते समय जो मुद्रा बनती है, उससे पाचों तत्त्वों का संतुलन बना रहता है और शरीर में ऊर्जा का स्तर बनाये रखने में मदत मिलती है.

रात मे दही खाना क्या नुकसानदेह होता है
आयुर्वेद के अनुसार रात में दही खाने से बचना चाहीये। असल मे दही कफकारक होता है। रात में हम भोजन के बाद मेहनत वाले काम करने के बजाय कुछ देर बाद सो जाते है। ऐसे मे दही की कफकारक प्रकृती उपद्रवी असर पैदा करती है.

दिन मे सुर्य के प्रभाव और श्रम की स्थिती में जो दही हमारी पाचन क्षमता बढाता है, वही रात में नुकसानदेह बन जाता है। इसके अलावा फेफडो में संक्रमण हो, सर्दी जुकाम की स्थिती हो, शरीर में कही सुजन हो तो दही का सेवन से बचना चाहिये.

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धन्यवाद दोस्तो

9/18/2018

Raw fruits vegetables, how appropriate it is for the human body

कच्चे फल सब्जिया यह मानव शरीर के लिये कितना उचित है

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नमस्कार दोस्तो
उचित-अनुचित से ज्यादा महत्त्वपुर्ण सवाल संभव-असंभव का है। यह सही है कि प्रकृती ने सारे जीव-जंतुओ के लिये कच्चा आहार ही उपलब्ध कराया है। हम मनुष्य ने बुध्दी का इस्तेमाल करके पकाने की कला अवगत कर ली है। और चीजो को स्वादिष्ट बनाने मे महारत हासील कर ली है। जाहीर सी बात है, इसे प्राकृतिक तो नही कहा जा सकता, हा जिस देश-दुनिया के माहौल मे हम रह रहे है, उसमे कच्चा खाकर रह पाना भी आसान नही है.

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Raw fruits vegetables, how appropriate it is for the human body
यदी फल-सब्जिया जैविक तरीको से बगैर रासायनिक खादों और दवाओं से उगाई गई हो, तो कच्चा अहार निश्चित ही रूप से सेहत के लिये वरदान हो सकता है। एलोपैथी डॉक्टर पुरी तरहा से कच्चा अहार अपनाने कि मनाई करते है, उसका कारण यह है कि चिकित्सा-विज्ञान की पढाई ही पके भोजन को आधार मानकर की जाती है। अधिकतर औषधी भी इसी हिसाब से बनी है। लेकिन यह आश्चर्यकारक सत्य है कि आप हिम्मत करके साल-दो साल पुरी तरहा कच्चा अहार पर रह जाये तो हो सकता है, आपकी बिमारिया भी जादुई ढंग से ठिक हो जाये.

रोगो की मार से हार रहे लोगो को यह सलाह दी जा सकती है  की वे एक बार किसी प्राकृतिक-चिकित्सा कि सलाह लेकर कच्चा अहार आजमा सकते है। यह अवश्यक ध्यान देने वाली बात है की कच्चा अहार शुरू करने पर आपके शरीर मे धिरे-धिरे  उपद्रव दिखाई पड सकते है। इसकी वजह है की हमारे शरीर को पके भोजन की आदत होती है। लेकिन कुछ महिने बाद आपके शरीर को कच्चे अहार के प्रती खुद संतुलित करता है। और फिर आप कच्चा अहार मे आनंद और स्फूर्ती महसुस करने लगते है.

धिरे धिरे आपकी बिमारिया रोग आपसे दुर होने लगते है। कच्चा अहार भले ही नही संभव हो तो आप अपने भोजन मे कच्ची चीजों ज्यादा से ज्यादा शामिल करना चाहिये, ताकी रोगो से आपकी रक्षा हो सके। कच्ची चीजों मै विटामिन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है.

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धन्यवाद दोस्तो...

9/13/2018

When and what food dinner and breakfast

भोजन व नास्ता कब और क्या हो

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नमस्कार दोस्तो
सबेरे सबसे पहले शौचादि से निवृत होने के बाद आसन-व्यायाम से 15, 20 मिनट पहले सबेरे के समय एक ग्लास पाणी में एक-दो चम्मच शुद्ध शहद और एक छोटा नीबुं निचोडकर पिना भी अच्छी आदत है। इससे शरीर से विषाक्ताता आसानी से बाहर हो जाते है। धमनिया का लचीलापन बना रहता है, और ह्रदयरोग की संभावना कम होती है। स्थुल शरीरवाले लोग सामान्य पानी कि जगह गुनगुना पानी ले.

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food dinner and breakfast
आसन-व्यायाम करने बाद 15-20 मिनट के बाद शरीर शांत हो जाने पर नास्ता करना चाहीये। नास्ते में मौसम के फल हो तो सबसे अच्छी बात है। लेकीन नास्ते मे पराठे, पुरी जैसी चीजो को शामिल करना आपकी दिनचर्या को आलस्य भरा बनाती है। नास्ते मे तली, भुनी, तैलीय पदार्थ कभी-कभार शौकिया तौर पर ही ले, हमेशा ध्यान रखना चाहिये कि नास्ता को हलका ही लेंना उचित है.

नास्ता के बाद कम से कम तीन घंटे बाद भोजन करना उचित है। दोपहर का भोजन 11-12 बजे तक और रात का भोजन 7-8 बजे तक कर लेना चाहीये। सोने से पहले ठंडे दुध में दो चम्मच शहद मिलाकर पिये। दुबले पतले लोग विषम मात्रा मे शहद और घी मिलाकर दुध ले सकते है। विषम मात्रा याने शहद के दो चम्मच तो घी एक चम्मच, घी के दो चम्मच तो शहद एक चम्मच। रात का भोजन किसी कारण न हो तो दुध मे शहद मिलाकर पिकर सो जाये।

महत्त्व पुर्ण बात ये है की कम खाकर लोग उतना बीमार नही पडते जितना कि ज्यादा खाकर, रात का भोजन हलका होना चाहिये। भोजन के अलावा विभिन्न प्रकार फल सलाद आवश्य शामिल करना चाहियें। शरीर को विटामिन कच्ची चीजों से ही मिलती है.

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धन्यवाद दोस्तो


9/12/2018

The elderly thinks bad is the habit of shaking the legs

बुजूर्ग बुरा मानते है बे वजहा पैर हिलाने की आदत को

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नमस्कार दोस्तो चलो जानते है क्या नुकसान हो सकता है
हा बे वजहा पैर हिलाने की आदत का सेहत से गहरा संबंध है। बुजुर्गो की कहावत अब विज्ञान भी सही सिद्ध कर रहा है। अध्ययनों के अनुसार बेवजह पैर हिलाने की आदत से हार्ट अटैक का खतरा दोगुना बढ जाता है। नाहक पैर हिलाते रहने से दिल की बीमारी बिन बुलाये आपके गले पड सकती है। चिकित्सा-विज्ञानयो कें अनुसार पैर हिलाने की समस्या वास्तव में नींद कम आने की समस्या से सीधे तौर पर जुडी हुई है। पीडित व्यक्ती नींद आने से पहले दो सौ से तिन सौ बार अपना पैर हिला चुका होता है।

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shaking the legs
इससे ब्लडप्रेशर और ह्रदय की धडकन बढ जाती है और यही दिल की बीमारी का बडा कारण बन जाती है। वजन, नशा, उम्र ब्लडप्रेशर के साथ जोडकर देखने से बे वजहा पैर हिलाना कई बार और भी खतरनाक हो सकता है। पैर हिलाने की आदत हो तो इसे नजर अंदाज न करे और जरूरत पडे तो इससे निजात पाने के लिये चिकित्सकीय परामर्श कर लेना.  

ज्यादा देर तक बैठकर काम करना नुकसानदेह साबित होता है 
ज्यादा देर तक बैठकर काम करने से सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिन्हे कुर्ची पर बैठकर काम करने की मज़बूरी हो, उन्हें भी हर दो घंटे के अंतर पर कम-से-कम दस मिनट के लिये खड़े होकर चहलकदम कर लेनी चाहिये, कुर्सी पर बैठकर कुछ योग क्रिया का अभ्यास करके भी शरीर को हरकत दे सकते है, अन्यथा बवासीर,सर्वाइकल,जैसी अन्य प्रकार बीमारिया बड़े आराम से अपनी चपेट में ले सकती है,लगातार आठ घंटे तक कुर्सी बैठे रहने से आपकी उम्र भी घट सकती है, आप बैठकर काम करते हो या खड़े होकर, ज्यादा लंबे समय तक लगातार काम करना भी सेहत के लिये अच्छा नहीं रहता,शरीर को जीतनी आराम की जरूरत है, उतनी जरूरत काम की भी है.  

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धन्यवाद दोस्तो

9/06/2018

Control the tridosha in the kitchen-rasoighar mein tridosh ko niyantrit kare

आज जानेंगे अपने रसोईं घर मे कैसे त्रिदोष पर नियत्रिंत कर सकते है 

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नमस्कार दोस्तों
आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ के अनुसार रोग तीन तरहा के होते है, अंतर्जात, बहिर्जात,मानस रोग। अंतर्जात रोग वह है, जो वात, पित्त,कफ के असंतुलन से होते है। बहिर्जात रोग वह है, जो की प्रदूषण, विष, जीवानु-विषाणु, आदी से उत्पन्न होते है। मानस रोग वह है, जो की मनुष्य के मनोकुल काम न होने के कारण उत्पन्न होता है। वैसे तो अलग-अलग दिखनेवाले इन तीनो रोगो में आपस में बहुत ही घनिष्ट अंतर्सबंध है। 


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Control-the-tridosha
जब शरीर में असंतुलन अंतर्जात बिमारिया होती है, तो वह बहिर्जात बिमारियो के लिये रास्ता बनाती है, कारण अंतर्जात बिमारियो से शरीर भीतर से इतना कमजोर पड जाता है, की बहिर्जात बिमारियो का सामना नहीं कर पाता है, इस तरहा से बहिर्जात कारणों से होनेवाली व्याधियाँ बिगाडने का काम करती है। इसी प्रकार से मानस रोग भी शरीर में त्रिदोष संतुलन को प्रभावित करता है.

बिना वात में गडबडी आये पित्त व कफ असंतुलित नही होता, वात में सबसे पहले आसानी से गडबडी इसलिये होती है, कि इसका जन्म वायु और आकाश से है, इन दोनो मे कोई भी हलचल होती है तो, वात असंतुलन हो जाता है। स्मरण रखे कृत्रीम रसायनो से ज्यादातर खाद्य पदार्थ वातकारी बन जाते है.

मनुष्य का शरीर सामान्य तौर पर अपनी प्रकृती के अनुसार ही भोजन ग्रहन करती है। जैसे की किसी खाद्य पदार्थ का प्रभाव वात, पित्त व कफ या मिश्रित प्रकृती की अलग-अलग स्थितीयों में शरीर पर अलग-अलग हो सकता है। जैसे की पित्त-प्रकोप से ग्रस्त व्यक्ती के लिये फुलगोभी नुकसान साबित कर सकती है, पर वही फुलगोभी वात-कफ वाले व्यक्ती के लिये फायदेमंद या कारगर साबित हो सकती है.

इस तरहा से देखो सेहत बनाये रखने के लिये हमे हमेशा अपने शरीर की वात, पित्त, कफ इन तिनो की मिश्रीत प्रवृत्ती की जानकारी होना जरुरी है और खाद्य पदार्थ के मुल जानकारी होना भी जरुरी है। अपनी मुल प्रकृती के अनुसार आहार-विहार अपनाये और त्रिदोषों का तालमेल रखें तो तमाम बिमारियो से आप बच सकते है, बिगडे वात-कफ वाला व्यक्ती आलु खाने का शौकीन है तो निश्चित रुप से अपनी प्रकृती को और ज्यादा असंतुलन करने का काम करेगा.

महत्त्व पुर्ण बात वही आलु के साथ टमाटर, लहसुन, अद्रक थोडा सा सेंधा नमक मिलाया जाये तो आश्चर्यजनक से वात-कफ को बढने से रोखा जा सकता है, अरहर की दाल मे देशी घी, जीरा, लहसुन, हिंग, आदी का बगार लगाने से दाल खुश्क प्रकृती के काबु मे करने का यह जबरदस्त उपयोग है.

अपने रोजमर्रा के भोजन मे संतुलन बैठाना कोई मुश्कील बात नही है, अपने देश की परंपरागत रसोई में त्रिदोष संतुलन को बनाये रखनेवाले सैकडो नुस्खे मौजुद है.

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धन्यवाद दोस्तों 

9/04/2018

Symptoms of cuff Cough and how to surviv-kaf ke lakshan aur kaise bachen

कफ के लक्षण और कैसे बचे

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नमस्कार दोस्तो आज कफ के बारे मे जान लेते है, कप ठोस, मृदु, चिकना, भारी, और ठंडा होता है, यह पृथ्वी और जल के संयोग से बना है, कफ के कारण ही हमारे शरीर में मजबुती, स्निग्धता, और स्वभाव में सहनशीलता, धैर्य, क्षमाशील, आदी गुण पैदा होते है, हमारे शरीर में दृढता का आधार कफ ही है.
कफ प्रकृतीवाले लोग मस्त तबीयत वाले लोग होते है, और सुदृढ शरीरवाले होते है, हल्की-फुल्की लापरवाही उनका कुछ नही बिगाड पाती, इसलिये अन्य प्रकृतीवाले की तुलना में ज्यादा स्वस्थ होते है, और कम बिमार पडते है, कोई भी काम आराम से करना चाहते है, आलस्य उन पर जल्दी हावी होता है।

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महत्त्वपुर्ण बात आलस्य कफ पवृत्तिवालों का सबसे बडा दुश्मन होता है, आलस्य कफ प्रवृत्ती असंतुलन का कारण बनती है, भोजन मे या नास्ता मे ज्यादा मिठा, नमकीन, तैलीय, और पचने मे गरिष्ट भोजन कफ-वृद्धी के कारण है.

यदी तंद्रा-निद्रा ज्यादा सताये, शरीर-में-भारीपन-लगे, थकान ज्यादा हो, मितली की प्रवृत्ती, आँखों मे सफेदी, गले में खराश, शरीर में ठंड की लहरी, आये तो समझ लेना की कफ असंतुलन पैदा हो गया है.
कफ प्रकृती के लिये गरम, तिखा, कडवा, और रूक्ष-आहार, अनुकुल पडता है। आप दिन में सोते होगे तो ये आदत छोडनी होगी, येसे लोगो को व्यायाम, योग, क्रिया करने से काफी राहत मिलती है, कफ और पित्त दोनों ही शांत हो जाते है.

इसी तरहा समय, वातावरण, मौसम, त्रिदोषों को प्रभावित करता है, सुबहा समय कफ, शाम समय को वात, दोपहर समय और रात समय को पित्त का प्रभाव प्रबल रहता है, और जानते है, तिनो ही ऋतु मे अलग अलग प्रभाव पडता है, जैसे बसंत व शीत मे कफ, पतझडग्रीष्म के कुछ समय के लिये पित्त और वर्षा ऋतु मे वात प्रबल होता है, जगंल मे वात, रेगिस्तान मे वात-पित्त, पर्वतीय क्षेत्रो मे वात-कफ, खाडी क्षेत्रो मे कफ-पित्त व मैदानी क्षेत्रो मे त्रिदोषों का सम प्रभाव रहता है, इसी तरहा बचपन मे कफ, जवानी मे पित्त,और बुढापे मे वात का प्रभाव रहता है, बच्चो मे शितल और निश्छल स्वभाव, जवानी-मे-उत्तेजना, बुढापे मे दर्द भरा शरीर, इन तिनो मे त्रिदोषों के प्रभाव पहचाने जा सकते है.

प्रकृती को समजते हुये कुछ सावधानियाँ रखें तो तमाम बीमारीयाँ से अपने शरीर को बचाया जा सकते है.

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धन्यवाद दोस्तो.....

9/01/2018

Fasting how and benefits-upavaas kaise kare isake phaayade

 उपवास कैसे करे इसके फायदे जानते है 

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नमस्कार दोस्तों
अपने देश मे बुजुर्गो की एक बुद्धिमत्ता सोच रही है। जो वास्तव मे स्वास्थ्य-आयुर्वेद और आयुर्वेद-चिकित्सा का मिलाप है. अपने समाज मे तमाम परंपराये जो स्वास्थ्य-विज्ञान के तहत शुरु हुई थी, पर आज हमने वह परंपरा विकृत कर दि है. असल मे भारतीय-जीवनशैली मे इस प्रकार की आहार-विहार से जुडी पुरानी परंपराओ का मुख्य निर्देशांक रहा है। व्रत उपवास और विभिन्न तरह के शुभ अवसरो पर किये जानेवाले व्यवस्थाये निर्धारित की गई, जैसे शुभ अवसरो पर हल्दी, बेसन, चंदन, उबटन लगाने की परंपरा है.


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                Fasting-how-and-benefits

आयुर्वेद में निर्जल उपवास, पुर्ण उपवास मानव शरीर के लीये  नुकसानदेह माना गया है। (निर्जला या पुर्ण उपवास से वात वृद्धि होती है)। उपवास करो लेकीन उसके साथ फल, दुध, फलोका जुस, शुद्ध और हलका पेय  का सेवन करना चाहीयेसामान्य दिनचर्या से अलग जनसामान्य के स्वास्थ्य कि रक्षा हो सके। आज हर तरफ अपने देश मे आयुर्वेद-चिकित्सा सेवाओ कि कमी है। यह महत्वपुर्ण बात है की जिन पंचमहाभूतो से हमारा शरीर निर्माण है, हमारे बुजूर्गो ने पुरखो ने उन्हे अलग अलग देवताओ के रुप मे पुजनिय बना दिया है। इसके अलावा अपने परंपराओ मे व्रत उपवास विधान से शारीरिक और मानसिक दोनो ही तरह कि स्वास्थ्य रक्षा का इंतजाम करके रखा है।

महत्वपुर्ण बात ये है। कभी भी निर्जला या पुर्ण उपवास न करेयह भी गौर करनीवाली बात है। हनुमानजी वायु से उत्पन्न देव है, उनका उपवास मंगलवार के दिन किया जाता है, हनुमानजी वायु से उत्पन है, तो उनका संबंध वायु से आता है। इस व्रत मे आप फल और दुध ले सकते है, और नमक का परहेज किया जाता है, पुरे दिन मे आप एक बार भोजन अन्नाहार कर सकते है। इससे आपको होने वाले आतंरीक शुद्धी और शरीर मे वात-संतुलन की दृष्टी से ही है.

शुक्रवार के दिन संतोषी माता का व्रत-उपवास किया जाता है, इस उपवास मे खट्टा परहेज होता है। इस उपवास मे नमक चलता है। दरअसल खट्टा पित्त-प्रकोप का कारण है। यह भी महत्वपुर्ण है की पित्त का संबंध बुद्धी से होने के नाते, पित्त असंतुलित हो तो बुद्धी भी विचलीत होगी। इस तरहा संतुलित पित्त के परिणाम संतोष-भाव पित्त-संतुलन की दृष्टी से ही है. नवरात्र-अन्य व्रत उपवास भी शरीर-शोधन की दृष्टी से महत्वपूर्ण है.

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धन्यवाद दोस्तों