9/06/2018

Control the tridosha in the kitchen-rasoighar mein tridosh ko niyantrit kare

आज जानेंगे अपने रसोईं घर मे कैसे त्रिदोष पर नियत्रिंत कर सकते है 

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नमस्कार दोस्तों
आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रंथ के अनुसार रोग तीन तरहा के होते है, अंतर्जात, बहिर्जात,मानस रोग। अंतर्जात रोग वह है, जो वात, पित्त,कफ के असंतुलन से होते है। बहिर्जात रोग वह है, जो की प्रदूषण, विष, जीवानु-विषाणु, आदी से उत्पन्न होते है। मानस रोग वह है, जो की मनुष्य के मनोकुल काम न होने के कारण उत्पन्न होता है। वैसे तो अलग-अलग दिखनेवाले इन तीनो रोगो में आपस में बहुत ही घनिष्ट अंतर्सबंध है। 


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जब शरीर में असंतुलन अंतर्जात बिमारिया होती है, तो वह बहिर्जात बिमारियो के लिये रास्ता बनाती है, कारण अंतर्जात बिमारियो से शरीर भीतर से इतना कमजोर पड जाता है, की बहिर्जात बिमारियो का सामना नहीं कर पाता है, इस तरहा से बहिर्जात कारणों से होनेवाली व्याधियाँ बिगाडने का काम करती है। इसी प्रकार से मानस रोग भी शरीर में त्रिदोष संतुलन को प्रभावित करता है.

बिना वात में गडबडी आये पित्त व कफ असंतुलित नही होता, वात में सबसे पहले आसानी से गडबडी इसलिये होती है, कि इसका जन्म वायु और आकाश से है, इन दोनो मे कोई भी हलचल होती है तो, वात असंतुलन हो जाता है। स्मरण रखे कृत्रीम रसायनो से ज्यादातर खाद्य पदार्थ वातकारी बन जाते है.

मनुष्य का शरीर सामान्य तौर पर अपनी प्रकृती के अनुसार ही भोजन ग्रहन करती है। जैसे की किसी खाद्य पदार्थ का प्रभाव वात, पित्त व कफ या मिश्रित प्रकृती की अलग-अलग स्थितीयों में शरीर पर अलग-अलग हो सकता है। जैसे की पित्त-प्रकोप से ग्रस्त व्यक्ती के लिये फुलगोभी नुकसान साबित कर सकती है, पर वही फुलगोभी वात-कफ वाले व्यक्ती के लिये फायदेमंद या कारगर साबित हो सकती है.

इस तरहा से देखो सेहत बनाये रखने के लिये हमे हमेशा अपने शरीर की वात, पित्त, कफ इन तिनो की मिश्रीत प्रवृत्ती की जानकारी होना जरुरी है और खाद्य पदार्थ के मुल जानकारी होना भी जरुरी है। अपनी मुल प्रकृती के अनुसार आहार-विहार अपनाये और त्रिदोषों का तालमेल रखें तो तमाम बिमारियो से आप बच सकते है, बिगडे वात-कफ वाला व्यक्ती आलु खाने का शौकीन है तो निश्चित रुप से अपनी प्रकृती को और ज्यादा असंतुलन करने का काम करेगा.

महत्त्व पुर्ण बात वही आलु के साथ टमाटर, लहसुन, अद्रक थोडा सा सेंधा नमक मिलाया जाये तो आश्चर्यजनक से वात-कफ को बढने से रोखा जा सकता है, अरहर की दाल मे देशी घी, जीरा, लहसुन, हिंग, आदी का बगार लगाने से दाल खुश्क प्रकृती के काबु मे करने का यह जबरदस्त उपयोग है.

अपने रोजमर्रा के भोजन मे संतुलन बैठाना कोई मुश्कील बात नही है, अपने देश की परंपरागत रसोई में त्रिदोष संतुलन को बनाये रखनेवाले सैकडो नुस्खे मौजुद है.

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धन्यवाद दोस्तों 

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