9/22/2018

Important information about constipation

कब्ज के बारे मे महत्त्वपुर्ण सुचना

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नमस्कार दोस्तो मौजुदा हालात में अगर रोगियों का वर्गीकरण किया जाये तो सबसे ज्यादा जिस रोग के लोग मिलेंगे, वह है कोष्ठबध्दता, यानी कब्जियत। आजकल के अप्राकृतिक आहार-विहार का अनिवार्य नतीजा है। मैदायुक्त पदार्थ जैसे कचौरी, समोसे, पुरी, पाव, बिस्कीट, तली-भुनी चीजें और तमाम तरहा के व्यंजन और श्रम हिन अनियमितता दिनचर्या, ये सब कोष्ठबध्दता के प्रधान कारण है। भोजन में रेषाविहीन चीजों को ज्यादा स्थान देने से और शरीर को पर्याप्त श्रम न करने के कारण आँतो कि सक्रियता कम होती है।


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Important information about constipation

शरीर को पर्याप्त गतिशील न रखा जाये तो जठर में पाचक रसों का भी पर्याप्त स्राव नही हो पाता। नतिजन, आहार की पाचन क्रिया मंद हो जाती है। और मल निष्कासन का काम बाधित होकर कोष्ठबध्दता की शुरुवात हो जाती है। कोष्ठबध्दता के नाते ही आँतो में मल सडकर विष बनता है और सारे रक्त को दुषित करता है। इस तरहा से और तमाम रोग उत्पन्न होते रहते है। इसी लिये आयुर्वेद मे कुपित मल को अधिकतर रोगों की जड कहा गया है.



इसके अलावा कब्ज का एक कारण ज्यादा मानसिक तान भी है। यदी हम मानसिक तनाव की स्थिती से गुजर रहे हों तो इसका असर पाचन संस्थान पर निश्चित रूप से पडता है। जठर में पाचक रसो का स्राव कम होने लगता है और पाचन क्रिया मंद हो जाती है। कुछ ऐसे उपाय है, जिनको आप अपने कोष्ठबध्दता की स्थिती से बचा जा सकता है। इस संबंध में पहली बात तो यह है कि हमें आहार को अच्छी तरहा से चबाकर खाना चाहिये। मतलब ठोस चीजों  को इतना चबाइये कि निवाला पिने लायक बन जाये। दाँतो का काम आँतो से नही लिया जाये तो अच्छा है।

यदी दाँतो का काम आँतो पर डाला जायेगा तो निश्चित हि रुप से आँतो कमजोर होगी और कोष्ठबध्दता जैसी बिमारिया पैदा होगी.

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धन्यवाद दोस्तो

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धन्यवाद दोस्तो आपके सुझाव के लिये....धन्यवाद