9/04/2018

Symptoms of cuff Cough and how to surviv-kaf ke lakshan aur kaise bachen

कफ के लक्षण और कैसे बचे

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नमस्कार दोस्तो आज कफ के बारे मे जान लेते है, कप ठोस, मृदु, चिकना, भारी, और ठंडा होता है, यह पृथ्वी और जल के संयोग से बना है, कफ के कारण ही हमारे शरीर में मजबुती, स्निग्धता, और स्वभाव में सहनशीलता, धैर्य, क्षमाशील, आदी गुण पैदा होते है, हमारे शरीर में दृढता का आधार कफ ही है.
कफ प्रकृतीवाले लोग मस्त तबीयत वाले लोग होते है, और सुदृढ शरीरवाले होते है, हल्की-फुल्की लापरवाही उनका कुछ नही बिगाड पाती, इसलिये अन्य प्रकृतीवाले की तुलना में ज्यादा स्वस्थ होते है, और कम बिमार पडते है, कोई भी काम आराम से करना चाहते है, आलस्य उन पर जल्दी हावी होता है।

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महत्त्वपुर्ण बात आलस्य कफ पवृत्तिवालों का सबसे बडा दुश्मन होता है, आलस्य कफ प्रवृत्ती असंतुलन का कारण बनती है, भोजन मे या नास्ता मे ज्यादा मिठा, नमकीन, तैलीय, और पचने मे गरिष्ट भोजन कफ-वृद्धी के कारण है.

यदी तंद्रा-निद्रा ज्यादा सताये, शरीर-में-भारीपन-लगे, थकान ज्यादा हो, मितली की प्रवृत्ती, आँखों मे सफेदी, गले में खराश, शरीर में ठंड की लहरी, आये तो समझ लेना की कफ असंतुलन पैदा हो गया है.
कफ प्रकृती के लिये गरम, तिखा, कडवा, और रूक्ष-आहार, अनुकुल पडता है। आप दिन में सोते होगे तो ये आदत छोडनी होगी, येसे लोगो को व्यायाम, योग, क्रिया करने से काफी राहत मिलती है, कफ और पित्त दोनों ही शांत हो जाते है.

इसी तरहा समय, वातावरण, मौसम, त्रिदोषों को प्रभावित करता है, सुबहा समय कफ, शाम समय को वात, दोपहर समय और रात समय को पित्त का प्रभाव प्रबल रहता है, और जानते है, तिनो ही ऋतु मे अलग अलग प्रभाव पडता है, जैसे बसंत व शीत मे कफ, पतझडग्रीष्म के कुछ समय के लिये पित्त और वर्षा ऋतु मे वात प्रबल होता है, जगंल मे वात, रेगिस्तान मे वात-पित्त, पर्वतीय क्षेत्रो मे वात-कफ, खाडी क्षेत्रो मे कफ-पित्त व मैदानी क्षेत्रो मे त्रिदोषों का सम प्रभाव रहता है, इसी तरहा बचपन मे कफ, जवानी मे पित्त,और बुढापे मे वात का प्रभाव रहता है, बच्चो मे शितल और निश्छल स्वभाव, जवानी-मे-उत्तेजना, बुढापे मे दर्द भरा शरीर, इन तिनो मे त्रिदोषों के प्रभाव पहचाने जा सकते है.

प्रकृती को समजते हुये कुछ सावधानियाँ रखें तो तमाम बीमारीयाँ से अपने शरीर को बचाया जा सकते है.

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धन्यवाद दोस्तो.....

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