10/07/2018

Digestive system prescriptions and disease (part 2)

पाचन तंत्र के रोग व नुस्खें (भाग 2 )

Digestive-system-prescriptions-and-disease-(part-2 )-paachan-tantr-ke-rog-va-nuskhe
नमस्कार दोस्तों 


  • विविध रोगनाशक एक किलो अजवाइन को 1 लीटर गोमूत्र में डाल दो। और तीन दिन के बाद गोमूत्र को छानकर अलग कर दो। अब अजवाइन को 1 लीटर मठ्ठे में डाल दो। एक दिन बाद छानकर सूखा ले, फिर 250 ग्राम कच्ची हींग को घी में सेककर सुका ले। फिर 100 ग्राम काला नमक व 50 ग्राम हींग, इन चारों  पदार्थ को कुट पीस कर छानकर डिब्बी में भर ले। इसे सुबह-शाम एक-एक चम्मच भोजन के बाद सेवन करे। इससे एसिडीटी, कब्ज, पेट की जलन, मलावरोध, अजीर्ण, खट्टी डकारे, कृमिरोग, बदहजमी, इत्यादि रोग सभी प्रकार के उदर रोग ठीक होते है। नियमित चूर्ण खाने से पाचनशक्ति बढ़ती है। 
    Digestive-system-prescriptions-and-disease-(part-2 ),paachan-tantr-ke-rog-va-nuskhe-(bhag-2),desi-health-tips,ayurved,lifestyle,विविध-रोगनाशक,एसिडीटी,कब्ज,पेट-की-जलन,मलावरोध,अजीर्ण,खट्टी-डकारे,कृमिरोग,बदहजमी,पाचनशक्ति,अग्निमांध,अतिसार-या-पतले-दस्त,पेचिश-मे-पथ्य-अपथ्य,छाछ,दही,मुंग-की-दाल,अनार-का-रस,रोटी,पराठे,नमकीन,मिर्च-मसाले,अचार-चटनी,तली,भुनी,मरोड़फल्ली,पेट-में-शूल,हरड़,इसबगोल,बबूल-का-गोंद,बड़ी-हरड़,सौंफ,बड़ी-हरड़,का-छिलका,सोंठ-व-सौंफ,
    Digestive system prescriptions and disease (part 2)
  • अग्निमांध अदरक की एक गाठ 15-20 ग्राम की लेकर उसका छिलका उतार कर उसके छोटे-छोटे और पतले-पतले टुकड़े बना ले। अब इन पर साधारण या काला नमक छिड़ककर प्रतिदिन भोजन से लगभग 10 -15 मिनट पूर्व चबाकर खा ले। ये जठराग्नि को प्रदीप्त करने का यह जबरदस्त उपयोग है। जिन लोगो को अग्निमांध की ज्यादा शिकायत होती है। उन्हें भोजन पूर्व 10-20 ग्राम अदरक का रस पी लेना चाहिये। चाहें तो इससे थोड़ा शहद भी मिला सकते है।
  • अतिसार या पतले दस्त सोंठ का चूर्ण 3-5 ग्राम छाछ या पानी के साथ लेने से दस्त रोगी को दिन मै 2-3 बार सेवन करने से दस्त रुक जाते है। छोटे बच्चे को भी सोंठ घिसकर दिया जा सकता है। सोंठ को और गुणशाली बनाने के लिये, सूखे नारियल का एक अखंड गोला लीजिये। और उसमे एक छोटा सा छेद करके सोंठ का चूर्ण कसकर भर दीजिये। अब गोले का छेद उसी टुकड़े से बंद कर ले। गोले पर अंरडी, बादाम, या केले की पत्ती लपेटकर पतले धागे से बांध दीजिये और उस पर काली मिट्टी का एक अंगुल मोटा लेप कीजिये। मिट्टी सूखने के बाद गोले को आग पर गरम कीजिये। जब गोला गरम होकर लाल सुर्ख हो जाये, तब आँच से हटाकर उसे ठंडा होने दे। ठंडा होने के बाद गोले पर से मिट्टी और पत्ते हटा कर गोला और सोंठ को पीसकर मिला दे। ये चूर्ण दस्त बंद करने के लिये लाभदाय इलाज है। 

पेचिश मे पथ्य-अपथ्य


  •  पेचिश 
  • छाछ, दही, मुंग की दाल, अनार का रस, इन पदार्थ का ज्यादा सेवन करना चाहिये। जब तक मरोड़ ख़त्म न हो, तब तक रोटी, पराठे, नमकीन, मिर्च-मसाले, अचार-चटनी, या तली, भुनी, पदार्थ से परहेज रखे। 

  1. मरोड़फल्ली, का चूर्ण रोगी को दिन मे तीन बार तीन ग्राम की मात्रा मे पानी के साथ या दही में मिलाकर देना चाहिये। 
  2. सोते समय अंरडी का तेल 1 चम्मच गरम पानी या दूध के साथ लेने से पेट में उठनेवाली पीड़ा शांत हो जाती है, मरोड़ मिट जाती है। 
  3. पेट में शूल उठने के साथ बार-बार शौच के लिये जाना पड़े और लगे की वायु फस गई है तो बेल, सोंठ, और लेंडी-पेपरी, का चूर्ण समभाग लेकर गुड़ और तेल के साथ मिलाकर सेवन करना चाहिये।
  4. हरड़ का चूर्ण 3-4 ग्राम दिन में 2 बार ठंडे पानी के साथ लेने से मरोड़ की शिकायत समाप्त हो जाती है।
  5.  मरोड़ में इसबगोल को दही या छाछ में मिलाकर लेने से लाभ होता है। 
  6. बबूल का गोंद 100 ग्राम राल 100 ग्राम व मिश्री 800 ग्राम इन तीनो को एक साथ कूटकर पीसकर छान ले। इसके बाद इन्हे पत्थर के खरल में 1 घंटे तक घोटाई करे, इस औषधी की 2-3 रत्ती या जीभ पर रखकर चूस ले पेचिश ठीक हो जाते है। 
  7. बड़ी हरड़ 100 ग्राम घी में भूनकर पीस ले। इसमें 100 ग्राम सोफ व 200 ग्राम मिश्री कूटकर मिला दे। इसे 10-15 ग्राम मात्रा में चावल के धोवन के साथ सेवन करने पर पेचिश में लाभ मिलता है। 
  8. सौंफ 50 ग्राम भून ले व उतनी ही सौंफ कच्ची पीस ले। इसमें मिश्री पीसकर मिलाये व 2-3 चुटकी दिन में 4-5 बार पानी के साथ सेवन करे। 
  9. बड़ी हरड़ का छिलका, सोंठ व सौंफ बराबर मात्रा में ले। अब सोंठ व बड़ी हरड़ को घी में भूनकर पीसे व सौंफ को अलग से पीसकर इसमें मिलादे सोते समय इस चूर्ण में पीसी चीनी मिलाकर 4 से 5 ग्राम तक पानी या दूध के साथ सेवन करे।
  • Digestive-system-prescriptions-and-disease-(part-2 )-paachan-tantr-ke-rog-va-nuskhe
  • धन्यवाद दोस्तों 

No comments:

Post a Comment

धन्यवाद दोस्तो आपके सुझाव के लिये....धन्यवाद